हौंसलों की उड़ान

दिल क्यों है इतना परेशान, 

हर मुश्किल होती आसान, 

दिल में जज्बा रखकर चलें, 

भरे हौसलों की उड़ान। 


हम लाचार पर कमजोर नहीं, 

राह मुश्किल पर नामुमकिन नहीं, 

हर राह में सुराग है, 

सफर को अपनी रोको नहीं। 


बना ले हम अपनी पहचान, 

राह को अपनी करें आसान, 

डर कर हम क्यों रुक जाए, 

भरें हौसलों की उड़ान। 


जीवन में ये है जरूरी, 

रखे हौसला न हो मजबूरी, 

मौसम यह बदलता रहता है, 

हौंसले से सफर तय होता है। 


पतझड़ हो फिर बसंत भी, 

पतझड़ से मत डरना कभी, 

पतझड़ के बाद फिर,

आती है बसंत बहार भी। 


हम जो चाहे वही राह मिले, 

राह वही हो यह जरूरी नहीं, 

मंजिल को अपनी पाना है, 

राही का बस काम यही। 


फूलों के संग कांटे भी होते, 

राहों में पत्थर भी मिलते, 

हौसलें से हमें चलना यहां, 

कांटो पत्थरों से हम क्यों घबराते । 


न हो हम यहां परेशान, 

संघर्ष करता हर इक इंसान, 

संघर्ष बिना जीवन कैसा, 

भर लें हौसलों की उड़ान। 


बने अर्जुन के समान,  

थाम ले तीर और कमान, 

लक्ष्य को अपनी निर्धारित करें, 

भरें हौसलों की उड़ान। 


गिराने वाले भी मिलेंगे, 

भटकाने वाले भी मिलेंगे, 

करके अनदेखा उनको, 

भरें हौसलों की उड़ान। 


स्वरचित -अनामिका मिश्रा 

झारखंड सरायकेला (जमशेदपुर)