“प्रेम का पूर्ण संवाद”

कान्हा तेरे पुलकित नैन

खिल उठा मन और उड़ गया चेन।

ठुमक ठुमक यू, चलना तेरा

मस्त मगन, ये चित मेरा।

हृदय रमे हो,  ओ माखन चोर

है तू ही बस मेरा, न दूजा और।

बांसुरी की धुन में, ये घुलना मेरा

किये नैन बन्द, और ये चेहरा तेरा।

टुकर टुकर यू देखे जाए

माखन लिए मृदु मुस्काये।

सुन भी ले ओ ब्रजवासी

तू तो मेरे मन को भाये।

एक तुझे पाने को, सब में विवाद है

और न कुछ चाहे मुझको

इक तुझे देखे जाना ही

मेरे प्रेम का पूर्ण संवाद है।


नीतू झारोटिया “रूद्राक्षी”

अजमेर (राजस्थान)