खेल ख्वाहिश

वर्षों की प्रतीक्षा का परिणाम अब है आ गया

हर जुबां पर नाम नीरज चोपड़ा का छा गया।


छा गया है नोजबान इतिहास पुनः उखाड़ कर

है ला दिया सोना उसने लौहे का लट्ठ गाढ़ कर।


गढ़ दिया इतिहास की युगों तक पुकारा जाएगा

भारती का लाल ध्वज भारत का जो लहराएगा।


स्वर्ण संग स्मरण रजत कांस्य का भी कीजिये

दिन रात की मेहनत का मान सदा ही कीजिये।


मान मीरा ने बढ़ाया जो भार सर पर धार कर

भार जो धारा गले में रजत ले आई धार कर।


दाहिया भी कम नहीं कुशाग्र कुश्ती में है बढ़ा

शत्रु के जबड़े से रजत रवि जो लेकर है खड़ा।


बजरंग भी बजरंग जैसे दाव कांस्य का लड़ा

पहलवानी के जगत में संचार शक्ति का पड़ा।


सिंधु की चिड़िया देखो खूब उड़कर छा गई

बैडमिंटन खेल पी वी कांस्य  लेकर आ गई।


मुकाबले में मुक्का लवलीना का कुछ यूं चला

एक और कांस्य अपने देश नाम ही हो चला ।


बेटों की हॉकी भी कांस्य पदक है लाकर खड़ी

पर बेटियां भी कम न थी अंत तक जाकर लड़ी।


निज खुशियाँ तज परिश्रम से लाते खुशहाली

जो ला न पाए पदक उनकी मेहनत नहीं खाली।


मैदान में हारे खिलाड़ी  आगे विजेता भी बनेंगे

बहा पसीना जुनून लेकर हर परिस्थिति से लड़ेंगे।


आज की वाहवाही में गुजरे पलों का जो हाथ है

त्याग और संघर्ष का किस्सा सभी के साथ हैं।


देख सोना चांदी देखो कितने हैं उत्साहित सभी 

अपने घर के बालकों को क्या खेलने भेजा कभी।


क्या क़िताबों सम ही क्रीड़ा को समझा है कभी

बच्चों की ख्वाहिशों पीड़ा को समझा है कभी।


जो चाहते हो देश को सदा शिखर पर निहारना

है कसम बच्चों की खेल ख्वाहिश कभी न मरना।


मेरी क़लम

अनामिका चौकसे"अनु"

जिला - नरसिंहपुर मप्र।