शनिवार को पहली बार दोनों स्टेशनों के बीच इलेक्ट्रिक इंजन को चलाया गया

आजमगढ़ ।आजमगढ़ मऊ के बीच 43 किमी लम्बे रेल खंड का विद्युतीकरण कार्य 25 किलोवाट क्षमता की विद्युत लाइन के साथ पूर्ण होने के बाद शनिवार को पहली बार दोनों स्टेशनों के बीच इलेक्ट्रिक इंजन को चलाया गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त उत्तर पूर्वी सर्किल, लखनऊ लतीफ़ खान ने इसका परीक्षण किया। इस दौरान वाराणसी मंडल के डीआरएम रामाश्रय पांडेय समेत अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे। रेल मंत्रालय की तरफ से पूरे देश में वर्ष 2023 तक सभी रेलवे लाइनों पर विद्युतीकरण का कार्य पूरा कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित है इसी क्रम में मऊ आजमगढ़ शाहगंज रेल मार्ग का विद्युतीकरण हो रहा है। हालांकि अभी मऊ से आजमगढ़ के बीच विद्युतीकरण का कार्य पूरा हुआ है अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर तक आजमगढ़ से शाहगंज गरीब 52 किलोमीटर का रेल मार्ग विद्युतीकरण से लैस हो जाएगा। अभी तक इस रेलवे मार्ग पर डीजल इंजन ही दौड़ते थे। मऊ से आजमगढ़ व शाहगंज होते हुए कई ट्रेनें दिल्ली मुंबई कोलकाता जैसे महानगरों की तरफ जाती हैं और यहां पर रेल यात्रियों की संख्या भी भरपूर है। इसलिए यहां पर रेलवे कि अधिक से अधिक सुविधा को लेकर जोर दिया जा रहा है। यहां के लोगों की भी रेलवे विद्युतीकरण को लेकर काफी दिनों से मांग की जा रही थी और आज यह इंजन आ गया। भले ही अभी इस मार्ग पर रेल इंजन के साथ ट्रेन को जाने में थोड़ा समय लगेगा लेकिन पहली बार जब इलेक्ट्रिक रेल इंजन आजमगढ़ स्टेशन पहुंचा तो लोगों के चेहरे पर खुशी दिखाई दे रही थी। डीआरएम ने बताया कि रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्वी सर्किल, लखनऊ इस विद्युतीकृत लाइन एवं रेल खण्ड का निरीक्षण कर संरक्षा परखेंगे। इसके बाद हरी झंडी मिलेगी। संरक्षा परिक्षण के क्रम में नव विद्युतीकृत लाइन पर विद्युत इंजन से स्पीड ट्रायल भी किया गया। निरीक्षण के उपरान्त अधिकतम गति से विद्युतीकृत लाइन पर रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा गति परीक्षण किया गया। मऊ-आजमगढ़ के मध्य रेलवे ट्रैक के आस पास रहने वाली जनता को बताया गया कि इस खण्ड को विद्युतीकृत समझें और रेलवे ट्रैक, ओवर हेड लाइन से सुरक्षित दूरी बनाये रखें। ओवर हेड लाइन में 25किलोवाट की हाई वोल्टेज डी.सी. करेन्ट प्रवाहित होने लगी है। साथ ही आम जनता से अनुरोध है कि अपनी सुरक्षा हेतु वे स्वयं, अपने बच्चों एवं अपने मवेशियों को रेलवे ट्रैक पर न आवें न आने दें। निरेक्षण के दौरान मुख्य विद्युत इंजीनियर, निर्माण ओ.पी.सिंह, समेत मुख्यालय गोरखपुर एवं वाराणसी मंडल के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित रहे।