118वीं जयंती पर बाबू भगवती चरण वर्मा के व्यक्तित्व पर हुई चर्चा

लखनऊ। मंगलवार को हिन्दी साहित्य के स्तंभ और कालजयी उपन्यास चित्रलेखा के रचनाकार बाबू भगवतीचरण वर्मा की 118वीं जयंती के अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व  पर चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन बाबू भगवतीचरण वर्मा के पुत्र धीरेंद्र वर्मा के गोमती नगर आवास पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ उदय प्रताप सिंह ने की। कार्यक्रम में अतिथियों एवं वक्ताओं का स्वागत करते हुए भगवती बाबू के पौत्र, रचनाकार एवं कवि, चंद्रशेखर वर्मा ने भगवती बाबू से जुडे कई संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम में अमित हर्ष, विनीता मिश्र, अलका प्रमोद, शारदा लाल, ज्योति सिन्हा, स्माइलमैन सर्वेश अस्थाना, शिवेंद्र वर्मा, रागिनी वर्मा, चारु वर्मा, रज्जन लाल, प्रमोद पांडेय, सुधीर मिश्रा, गोपाल सिन्हा, मनीष शुक्ल आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। व्यंगकार सर्वेश अस्थाना ने भगवती बाबू को याद करते हुए उनकी रचनाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समाज को जीवन जीने का सही मार्ग साहित्य की रोशनी में ही दिखता है। डॉ उदय प्रताप सिंह ने बाबू भगवतीचरण वर्मा को याद करते हुए उनकी रचना चित्रलेखा को कालजयी कृति बताया। कार्यक्रम में भगवती बाबू के पुत्र धीरेंद्र वर्मा ने कई बाबूजी से जुडे कई संस्मरण सुनाये। कार्यक्रम के अंत में धीरेन्द्र वर्मा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।