देश के बैंकिंग सिस्टम की साइबर सुरक्षा को लेकर खतरा बरकरार, रिजर्व बैंक के नए सर्वे ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक देश के बैंकिंग सिस्टम की साइबर सुरक्षा को लेकर खतरा अभी भी बरकरार है। कोरोना महामारी के बाद इसे इकोनॉमी के लिए भी बड़ा खतरा माना जा रहा है। RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर खतरा पिछले साल अक्टूबर के ही स्तर हाई रिस्क जोन में बना हुआ है।

आरबीआई साल में दो बार सिस्टेमिक रिस्क सर्वे कराता है। पिछली बार ये सर्वे अक्टूबर महीने में हुआ था इस बार ये अप्रैल में शुरू होकर मई तक चला। सर्वे के नतीजों के मुताबिक साइबर रिस्क पिछले साल के स्तर पर ही बरकरार है। रिपोर्ट में बताया गया है कि खतरे को देखते हुए वित्तीय संस्थानों को इसे रोकने से जुड़े सुझाव दे दिए गए हैं। ताकि सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिखा में कदम उठाया जा सके। ये सर्वे विशेषज्ञों और बाजार के प्रतिनिधियों के बीच कराया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में अब तक हमलावरों ने पेमेंट सिस्टम को ही अपना लक्ष्य बनाया है। साइबर ठगों का काम करने का तरीका पेमेंट कार्ड की जानकारी चुराना और एटीएम इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए नुकसान पहुंचाने जैसी चीजों से जुड़ा रहा है। इसके लिए रिजर्व बैंक की तरफ से इन खतरों से बचाव के लिए अलर्ट भी जारी किए गए हैं।

रिजर्व बैंक की इस रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि बैंकों को बढ़ते डिजिटल लेन देन को देखते हुए सुरक्षित आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की दिशा में निवेश से हिचकिचाने की जरूरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों को साइबर हमलों का शिकार होना पड़ा है। SBI को साइबर हमले की आशंका में करोड़ों ग्राहकों को नया डेबिट कार्ड जारी करना पड़ा।

रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने रिपोर्ट में दिए अपने वक्तव्य में साफ कहा है कि कोरोना महामारी के दौर में इकोनॉमिक रिकवरी के साथ नए खतरे भी पैदा हो रहे हैं। इन खतरों में महंगाई, अनिश्चितता, दुनियाभर में डाटा चोरी के साथ साथ साइबर खतरों को भी अहम माना जा रहा है।

बढ़ते साइबर खतरे में लोग सावधान रहें इसके लिए आरबीआई भी अपनी तरफ से लगातार मुहिम चला रहा है। रिजर्व बैंक ने लोगों को सलाह दी है कि मोबाइल या ईमेल के जरिए आने वाले किसी भी अनजान लिंक को क्लिक न किया जाए। ऐसे लिंक का कभी भी कोई जवाब नही देना चाहिए बल्कि संदेह होने पर तुरंत डिलीट करने में ही भलाई है। साथ ही ओटीपी, यूपीआई पिन, क्रेडिट और डेबिट कार्ड की जानकारियां भी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह रिजर्व बैंक की तरफ से दी जाती रहती है।