अकेलापन

छोड़  दिया  उम्मीदों के  दीप जलाना

अब तो  खुद ही  यहाँ  मुझे जलना है


मुसाफिरखाना  सा  हो गई  है जिंदगी

कदम  दर  कदम  बस  मुझे चलना है


चाल  चलन देखकर  इस  दुनियाँ का 

अकेलेपन  के  एहसास  में  ढलना  है


बहुत आए  अपना  पराया कहने वाले

पर मुझे पता अकेले ही यहाँ चलना है,,


 महेश राठौर सोनू

 गाँव राजपुर गढ़ी

 जिला मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश