पेट्रोल-डीजल के रेट में लगी आग ठंडी होने की उम्मीदों को झटका, जाने वजह

नई दिल्ली : अगर आप पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे हैं तो आपकी उम्मीदों को झटका लग सकता है। सऊदी अरब और यूएई के बीच ताजा विवाद के बाद संकट और बढ़ सकता है। सोमवार को ओपेक प्लस की बैठक बेनतीजा रही साथ ही अगली मीटिंग को लेकर भी अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में इस नए उपजे विवाद के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढेंगी और जिसका असर आप पर भी दिखेगा। 

क्या है विवाद की वजह 

सऊदी अरब का प्रस्ताव था कि मौजूदा डील को प्रोडक्शन में इजाफा के साथ 2022 तक के लिए बढ़ा दिया जाए। यूएई इसी प्रस्ताव का विरोध कर रहा है। रियाद का मानना है कि महामारी का असर अब भी बाजार पर है। ऐसे में डील आगे बढ़ाकर बाजार में सामंजस्य बनाया रखा जा सकता है। 

1 जून की बैठक में क्या हुआ था फैसला 

तेल निर्यात देशों के संगठन (ओपेक) और सहयोगी उत्पादक देश तेल उत्पादन बढ़ाकर 21 लाख बैरल प्रतिदिन करने का फैसला हुआ था।  वास्तव में ओपेक और संबद्ध उत्पादक देशों के सदस्य वैश्विक तेल बाजारों में परस्पर विरोधी दबावों से जूझ रहे हैं। एक तरफ जहां भारत जैसे कुछ देशों में कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण मांग कम होने का अंदेशा है, जबकि कुछ देशों में आर्थिक पुनरूद्धार हो रहा है, जिससे मांग बढ़ने की उम्मीद है। संगठन ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया गया था।

कच्चे तेल की कीमतों में एक बार इजाफा देखने को मिल सकता है। यह एक बार फिर 80 डाॅलर प्रति बैरेल तक पहुंच सकता है। जनवरी से अबतक भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत 60 डाॅलर से 75 डाॅलर प्रति बैरेल पहुंच गई है। जिसकी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों पेट्रोल की कीमतें 100 के पार पहुंच गई हैं। 

केन्द्र सरकार ने पिछले साल मार्च से मई के बीच पेट्रोल पर 13 रुपये और डीजल पर 16 रुपये एक्साइज बढ़ा दिया था। मौजूदा समय पेट्रोल पर 32.98 रुपये और डीजल पर 28.35 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूली जा रही है। टैक्स और महंगे कच्चे तेल की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं।