बना है मिट्टी से

हादसों से डरता है वह

कहीं हादसा न हो जाए

लोहे का नहीं बना है वह

आखिर बना है मिट्टी से

कहीं वह टूट न जाए

कहीं बिखर न जाए

हादसे किसी से कभी

पूछते कहां है हादसे

इनकी आंखे नहीं हैं

इनका दिल नहीं है

यूं डरता है हादसे से

हादसा न हो जाए

पूनम पाठक बदायूँ