भाजपा के दांव से सपा चित

उन्नाव। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के राजनीतिक धोबी पछाड़ दावं से सपा चित हो गई है। अब भाजपा ने समाजवादी पार्टी के समर्थित सदस्यों को अपने पाले में लाने की कवायद शुरू कर दी है। राजनीति के जानकारों की मानें तो ज्यादा समर्थित सदस्यों को जिता कर लाने वाली सपा को भाजपा ने एक ही दांव से चुनाव से अलग-थलग कर दिया है। मालती रावत के चुनाव मैदान के हटने से भाजपा के मंसूबे सफल होते दिख रहे हैं।त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सपा समर्थित 18 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए थे। इससे अध्यक्ष् के चुनाव में सपा ही सबसे मजबूत मानी जा रही थी। भाजपा ने दांव चलकर सपा प्रत्याशी को ही अघोषित रूप से अपने पाले में ले लिया था। भाजपा अध्यक्ष चुनाव में सपा को चित करने में सफल रही है। हालांकि अब भाजपा की निगाहें सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों पर हैं। सपा ने भी अपने सदस्यों को चुनाव में स्वविवेक से निर्णय लेने के लिए छोड़ दिया है। इससे भाजपा की राह आसान होती नजर आ रही है। हालांकि संगठन पदाधिकारियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं क्योंकि भाजपा प्रत्याशी शकुन सिंह के सामने अभी बागी अरुण सिंह चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। भाजपा के सूत्रों की माने तो अंदरखाने एक प्रत्याशी को अघोषित रूप से चुनाव में निष्क्रिय रखने की कवायद की जा रही है।भले ही मालती रावत ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव न लड़ने की बात कही हो लेकिन प्रशासन की निर्वाचन सूची में तीन प्रत्याशी ही रहेंगे। सहायक निर्वाचन अधिकारी (पंचायतध्निकाय) डॉ. संजय द्विवेदी ने बताया कि नामांकन वापसी के दौरान जो उम्मीदवार पर्चे वापस लेते हैं उनकी ही गिनती आयोग द्वारा की जाती है। पर्चा वापसी का समय निकल जाने के बाद जितने उम्मीदवार मैदान में बचते हैं उसे ही अधिकृत प्रत्याशी माना जाता है। भले ही बाद में उनमें से कोई एक-दूसरे का समर्थन कर दे या चुनाव न लड़ने की घोषणा करें। आयोग में उसकी कोई गिनती नहीं होती है। इसलिए आयोग की अंतिम सूची में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन ही प्रत्याशी हैं।