यह मिट्टी का गागर

टूटते तारों सा 

किस क्षण टूट जाएगा

यह मिट्टी का गागर,

समेटे कितने रत्नों को 

नीर पूर्ण यह गागर 

जीवन पर्यंत प्यासा ही रहता, 

कुम्हार ने दिया सुंदर आकार 

रंग बिरंगे कितने प्रकार 

परंतु मिट्टी एक ही है,

हमने इसमें भर दिया 

जात_ पात,द्वेष, लोभ, इच्छा,के 

कितने सारे कंकड़ _पत्थर, 

जिससे दब चुकी है 

नीचे रत्नों की एक सत्ता, 

किंचित गागर में 

यह रत्न ऊपर तक आता है

जहां निर्मल जल निःस्वर्थ है,

अन्यथा ये रत्न 

नीचे दबे ही रह जाते हैं,

गागर के टूटने के साथ 

अंतर्ध्यान हो जाते है।।


कवयित्री -अंजनी द्विवेदी(काव्या)

जिला देवरिया उत्तर प्रदेश