ईश्क मजबूर हुआ,

क्यूँ  रुठ कर गया वो ,

मेरी महफिल से,

एक खालिस सी दिल,

की बारगाह में है ,

हर कसम तोड़ के,

आज मैंने पीली है,

ईश्क मजबूर हुआ,

हुस्न निगाह में है ,

क्यों चमकते है तारे

चंदा के आस पास ,

कई सवाल मेरी दिल,

की आह में है ,

कौन गुजरा है मेरी ,

दिल की रह गुजर से,

मुश्ताक मेरी आंखे बस,

उसी गर्दे राह में है । 


डॉ . मुश्ताक़ अहमद शाह

'सहज़'  हरदा मध्यप्रदेश