लक्ष्य

जीवन का रिमझिम पावस, अरमां अपना साकार हुआ ।

शैल- शिखर की मिट्टी पर, राज बगिया गुलजार हुआ ।।


सुख-शांति की डयोढ़ी पर, कुल- गरिमा को लक्ष्य मिला । 

नव - अंकुर के आगमन से, खुशियों का भरमार हुआ ।।


उष्ण मौसम में जब बिखरा, ऋतु वसंत सी मादकता । 

हर्ष के अर्श तक पुलकित, नयनाभिराम गुलनार हुआ ।।


नव ज्योति के प्रकाश में, विधाता की दक्ष सौगात ।

अग्रजों का सद्कर्म सहेजे, अनुपम सा संसार हुआ ।।


आँखों ही आँखों में, भावनाओं की नन्हीं शरुआत ।  

सोनी सी गुलशन में, अंतर्मन का जयकार हुआ ।।  


चिर प्रतीक्षित अभिलाषा, कैरियर विकास का सोपान । 

गुंजनमय चतुर्दिक हर्षोल्लास, शुभ्र ज्योति इजहार हुआ ।। 


घर आँगन की चंचल धड़कन, नैसर्गिक संयोग निराली ।

आह्लादित "फरहाद" को अब, लक्ष्य का पारावार हुआ ।।


अमरजीत कुमार “फरहाद “ 

लेखानगर , नासिक