बीज खुशी के

लगते प्यारे

जीवन दाता हैं ये

वृक्ष हमारे।


उर सभी के

ऊसर अब, बोयें

बीज खुशी के।


मन में जाले

जीवन उपवन,

निकाल डालें।


सुंदर झांकी

जीवन है किताब

पढ़ना बाकी।


कर्म विशेष

जीवन पर्वत पे

चढ़ना शेष।


यह संसार

प्रीति पगा जीवन

उर बहार।


जैसी करनी

न्यूटन का नियम

वैसी भरनी।


सघन रात

विश्वास है मन में

होगा प्रभात।

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प्रमोद दीक्षित मलय

शिक्षक, बांदा (उ.प्र.)