आस्तीन का साँप

बाढ़ की आपदा में बहकर आए हुए नवजात को अपने कलेजे का टुकड़ा मान लिया था हरिया और उसकी पत्नी ने। एक केले के थंभ  पर रखकर किसी ने जैसे भगवान भरोसे ही छोड़ दिया हो।

उसी को आशीर्वाद स्वरुप मानकर निसंतान दंपति की माता पिता कहलाने की आस भी पूरी हो गई थी।

गंगा का कछार वाला इलाका हमेशा एक जैसा नही रहता।

जिंदगी की जद्दोज़हद चलती रहती है फिर भी हरिया अपने बेटे को हमेशा मुश्किलों से सामना करने के लिए ही सिखाया था।

अपनी खेतों पर मेहनत से उगाई गयी फसल पर किसी और के द्वारा धावा बोलने से बेटे के मन मे विद्रोह की भावना जन्म लेने लगी थी,जो धीरे धीरे गुनाह की ओर ले जा रही थी।

 वर्चस्व की लड़ाई में एक कुख्यात जन्म ले चुका था।

जिगर के टुकड़े के रुप में अपने आस्तीन में साँप  को पाल रहा था । हथियार के दम पर दियारा क्षेत्र मे वह लुटमार कब मचाने लगा ,ये बात उसका पता बताने वाले को ईनाम स्वरुप पचास हजार की रकम से पता चली।


स्वरचित

सपना चन्द्रा