प्रथम व सर्वश्रेष्ठ गुरु "माँ" को नमन

जिसने गर्भ से ही दिए

संस्कार अपने सारे

पग पग उंगली थामे

चलना, गिर के संभलना सिखाया

अच्छे बुरे का बोध कराया

हर कदम दिया साथ

लगे न ठोकर कोई गहरी

आज तलक जब जीवन के

बीत चुके बसंत अनन्त

"माँ" के संस्कार और शिक्षा

ही है जीवन की ढाल ।।

उसके बाद

सभी "अध्यापक" जिन्होंने

दी शिक्षा

और संवारा जीवन 

उसके बाद उन सभी

"रिश्तों" को  

जिन्होंने जीवन का बोध कराया

किताबों में जो न मिला

वो समय और रिश्तों ने समझाया

इस तरह हर पग पर

मिलती रही नित शिक्षा नई

बस बदलते रहे गुरु और शिक्षा

के संसाधन 

आज गुरुपूर्णिमा का दिन

करते हैं समर्पित हर उस गुरु

को जिस ने अपने तरीके से

ही सही दी जीवन की राह।।


मीनाक्षी सुकुमारन

     नोएडा