नमक

वफ़ा का,नमक जफा़ का,

नमक धरती का स्वाद हैं,

जले पर नमक- 

दुख का अभिप्राय हैं?

नमक भोजन का स्वाद हैं,

फिकी पड़ जाती है,दाल

सब्जी बिना नमक के,

समुद्र में नमक,हर जीव में नमक,

रूप का नमक,

जीना मुहाल करता है, 

स्त्री का,सरकारी वर्दी में नमक,

हराम कर देता है जीना गरीब का,

नमक की कीमत क्या जाने 

नमक हराम,जो चंद रुपयों की 

ख़ातिर बेच देता है ईमान।

कितनी ही क्रांति हुई 

इस नमक के लिए,

बापू का डांडी मार्च गवाह है,

साबरमती के पानी का सवाल है,

बरसी कितनी लाठियां,

कराह उठी थी धरा,

तब कही मिला नमक,

स्वदेश का नमक,

दुनिया में वरदान है नमक,

आशीर्वाद ईश्वर का है नमक,

तभी तो बहता है नमक,

कभी नैनो के आंसू बन,

तो कभी मेहनत का पसीना बन,

हम रहे या न रहे,

रहेगा सदैव दुनिया में नमक,

जल में,थल में,तन में,नमक।


सुनीता सिंह 'सरोवर',वरिष्ठ कवयित्री व

शिक्षिका,उमानगर-देवरिया उत्तर प्रदेश