एक सच

मेरे भाई के दोस्त की माँ  के निधन की शोक मे तिसरे दिन मै अपनी बडी भाभी के साथ उनके घर उनसे मिलने गई थी अचानक बातों के दौरान मेरी नजर रिया की ओर खिंचती चली गई उसके आँखो मे किसी को खोने का दर्द साफ दिख रहा रहा था ।मैं एक कदम आगे बढी ही थी कि रिया से कुछ बातें कर लूं एकाएक उसकी माँ बोल पडी--

"उसकी दादी को खोने का दर्द है उसे " यही तो है जो अपनी दादी का मलमूत्र सब अपने हाथों से साफ करती थी ।स्कूल जाने से पहले और आने के बाद उसका यही काम रहता था कि मेरी दादी विस्तर गीला तो नहीं की है हमेशा एक माँ की तरह निस्वार्थ प्यार करती थी ए सब सुनकर मै एकपल को हस्तप्रद रह गई नन्ही रिया के सामने मै अदना सा महसूस कर रही थी उसे सीने से लगाए बिना मै रह न पाई उसे सीने से लगाकर मै सुकून महसूस कर रही हूं उसकी कोमल नन्ही हाथो को मेरे अधर चूमती रह गई जिस हाथों से उसने अपनी दादी की सेवा की थी मेरी आँखों के आँसू उसकी हथेली पर गिरकर धन्य हो गई वो तो मुझसे ज्यादा मात्रभक्त थी -------

"माता -पिता की धरोहर ही नहीं आधार है बेटियाँ "

लता नायर

जनपद लखनपुर सरगुजा छ०ग०