प्रणय मिलन के रंग

नीले वस्त्रों में खड़ी, तरुवर नीचे नार।

बादल दाने डालता, करता काम प्रहार।।

करता काम प्रहार, नवल घन प्यार लुटाये।।

सावन शीतल नीर, झरे तन ताप बढ़ाये।।

कहैं मलय कविराय, नयन लख नवल नशीले।

अरुण कमल द्वय खिले, देह जल सरवर नीले।।


अंजन आंखो में बसे, प्रणय मिलन के रंग।

मलय पवन की छुवन से, प्रमुदित तन-मन अंग।।

प्रमुदित तन-मन अंग, सजे उर सपने गहरे।

सावन बरसे नेह, खिले हैं सुमन सुनहरे।।

कहैं मलय कविराज, रैन रुचि सुखकर रंजन।

पाकर परमानंद, तृप्त उर आंखें अंजन।।

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प्रमोद दीक्षित मलय

शिक्षक, बांदा (उ.प्र.)

मोबा. 94520-85234