रिमोट सेंसिंग के माध्यम से वैज्ञानिकों ने नदीके उद्गम स्थल से लेकर महाराजगंज तक के पथ का सर्वे किया

आजमगढ़ । मूल (छोटी) सरयू बचाओ अभियान में शोध की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया। रिमोट सेंसिंग के माध्यम से वैज्ञानिकों ने नदी के उद्गम स्थल से लेकर महाराजगंज तक के पथ का सर्वे किया। लोक दायित्व के आमंत्रण पर मूल सरयू बचाओ अभियान में दो बड़े नाम जुड़े। डॉ. श्याम कन्हैया सिंह विभागाध्यक्ष भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग, पूर्वांचल विश्वविद्यालय, विशेषज्ञता नदी जनित आकृतियां डॉ. सौरभ सिंह, वैज्ञानिक, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, विशेषज्ञता - रिमोट सेंसिंग तकनीकी एवं मैपिंग। 

मूल सरयू बचाओ अभियान के संयोजक पवन के नेतृत्व में दोनो वैज्ञानिकों ने नदी के पूर्व पथ की मिटी एवं बालू का नमूने एकत्र किए जिससे पूर्व में नदी के बहाव एवं उसके आयु का निर्धारण किया जा सकेगा। रिमोट सेंसिंग तकनीकी से 1972 से लेकर अद्यतन नदी की स्थिति, उसके प्रवाह, एवं अब तक हुए पथ विस्थापन का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। तदुपरांत उसका मानचित्रीकरण एवं डाटा तैयार किया जाएगा। 

इस विषय में नदी जनित आकृतियों एवं प्रक्रियाओं के विशेषज्ञ डॉ श्याम कन्हैया सिंह का कहना है कि " रिमोट सेंसिंग अध्ययन के उपरांत नदी मार्ग की जगह जगह खुदाई करके  प्राप्त आकृतियों एवं स्थलाकृतियों से हम अध्ययन को और पुख्ता कर सकेंगे। छोटी नदियों के विषय में कोई ध्यान नहीं दे रहा है, पवन सिंह की यह पहल सराहनीय है, हमें भी इस अभियान से जुड़कर अच्छा लग रहा है। यह छोटी नदियां बचेंगी तो बड़ी नदियां स्वयं ही बच जाएंगी।" 

रिमोट सेंसिंग तकनीक एवं मैपिंग विशेषज्ञ डॉ सौरभ सिंह का कहना है कि " इस अध्ययन के सामने आने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि  बांध बनने से एवं पिछले 5 दशकों से लोगों के कारण नदी का कितना नुकसान हुआ है। नदी क्यों अंतिम सांसे लेने लगी थी। यह अध्ययन नदी के पुनर्जीवन में सहायक हो सकेगा। शायद हम भी इसको सदानीरा बनाने में पवन जी के सहयोगी हो सकें।"

 मूल सरयू बचाओ अभियान के संयोजक पवन कुमार ने कहा कि " इस अभियान का परास धीरे धीरे बड़ा होता जा रहा है। इस अभियान का यह एक बड़ा कदम है कि दो नौजवान वैज्ञानिक साथी इस अभियान को वैज्ञानिक सोच और शोध उपलब्ध करा रहे हैं, जिसका लाभ आने वाले समय में छोटी नदियों पर काम करने वाले सभी लोगों को प्राप्त हो सकेगा।"