॥ मेरा गाँव ॥

मेरा गाँव जन्नत का डेरा

पहली सूरज का नित्य बसेरा

झरने से गिरता दुधिया पानी

सरगम की अनोखी इक कहानी


गाँव मेरा जन्नत का डेरा

मुड़ेर पे गौरेया का बसेरा

रोज मनाते होली दीवाली

शुद्ध हवा पीपल बना माली


गाँव मेरा जन्नत का डेरा

जहाँ कीचड़ में कमल खिल जाता

गाँव जवार खुला मैदान

पहाड़ों से हवा छन छन कर आता


गाँव मेरा जन्नत का डेरा

खेत खलिहान हरा भरा लहलहाता

धान की बालियाँ सोने जैसी कलियाँ

मन को मन भावन सा लगता


गाँव मेरा जन्नत का डेरा

मंदिर में शंख घंटा नित्य गुंजते

नदियाँ खेतों की प्यास बुझाती

किसान खेतों में फसल उगाते


गाँव मेरा जन्नत का डेरा

जहाँ पर्वों का मेला लगता

चाचा के काँधे पे बैठकर

मेले का आनंद है मिलता


गाँव मेरा जन्नत का डेरा

चमन में खुशयाली के फूल हैं खिलते

ईष्या द्वेष तनिक भी नहीं होती

अमन की कलियाँ नित्य हैं दीखते


मेरा गाँव जन्नत का डेरा

जहाँ झोपड़ी भी महल सा लगता

प्रकृति की गोद में बसकर

जन्नत का सुकून है मिलता।


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088