सुमन सुवासित रूठ गये

पल भर में हृदय सजे सपने सारे टूट गये।

उपवन के सुमन सुवासित माली से रूठ गये।

जीवन की नौका बहते-बहते मझधार फंसी, 

साहिल से पतवार कगार किनारे  छूट गये।

                   

कली भ्रमर का मधुर साथ नहीं रहा उपवन में।

पुष्पित पौधे सब सूख गये जीवन मधुवन में।

नदी-निर्झर के कलरव में न मीठा राग रहा, 

दौड़ रहे नीरस निर्जल घन सूने अम्बर में।।


सरस कली का मोह छोड़ अंतस की राह पकड़।

प्रेम पराग पिया बहुत अब भक्ति की बांह पकड़।

जीवन के खाते से पृष्ठ बिखरना जारी है,

बेसुध मलय समीर जाग चेतन की चाह पकड़।।

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प्रमोद दीक्षित मलय

शिक्षक, बांदा (उ.प्र.)

मोबा. 94520-85234