स्वयं से भी प्यार करना सीखिए

प्रेम से बढ़कर कोई भाव न दूजा

यही अर्चना और यही है पूजा

जी हां दोस्तों सही कहा गया है कि प्रेम हमारे जीवन का आधार है, यह दुनिया प्रेम पर ही चल रही है, यदि प्रेम ना होता तो यह संसार ना होता ,यदि प्रेम ना होता तो हम सब के दिलों में एहसास ना होते, जज्बात ना होते क्योंकि प्रेम ही हमें जीना सिखाता है ,प्रेम हमारी दुनिया बदल देता है ।यह प्रेम का एहसास ही तो होता है जो दिलों से दिलों को जोड़ता है ,दिलों में दया, करुणा का भाव भी प्रेम ही जागृत करता है ।यदि प्रेम ना होता तो इंसान संवेदना शून्य हो जाता।प्रेम हमारे संवेगों को नई दिशा प्रदान करता है,प्रेम हमारे जीवन को संवारता है। एक दूसरे के प्रति प्रेमभाव रखने से हम सब सामूहिक रूप से एक सुंदर समाज की नींव रखते हैं। 

यदि जीवन में प्रेम इतना ही महत्वपूर्ण है तो एक दूजे को प्रेम करने के साथ-साथ मनुष्य को सबसे पहले स्वयं से प्रेम करना सीखना होगा।जी हां अंग्रेजी भाषा में इसे सेल्फ लव कहा जाता है। सेल्फ लव अर्थात हमें स्वयं से प्यार करना चाहिए ,अपनी भावनाओं और जज्बातों की कदर करनी चाहिए। स्वयं से प्यार करना बहुत जरूरी है ,क्योंकि जो व्यक्ति खुद से खुले दिल से प्यार करता है वही व्यक्ति दूसरों से भी बेशुमार प्यार करने में सक्षम हो पाता है। दिन रात कामकाज की भाग दौड़ में लगे रहने के बाद हम में से अधिकतर लोग तो स्वयं के लिए समय निकालना ही भूल जाते हैं, स्वयं को सराहना भूल जाते हैं ।यहां यह बात बता देने वाली है कि यदि हम स्वयं का ख्याल नहीं रखेंगे ,स्वयं पर ध्यान नहीं देंगे तो हम किसी भी सूरत में अपनों को का ख्याल भी नहीं रख पाएंगे।जिंदगी में सफलता प्राप्त करने के लिए हम सभी जी जान से जुटे रहते हैं, परंतु यदि हम ख़ुद को ही प्रसन्न नहीं रख पाते हैं तो उस सफलता का क्या मूल्य है ।दूसरों को समय देने के साथ-साथ हमें स्वयं के लिए भी समय निकालना चाहिए।अपनी जिंदगी को खुशहाल तरीके से जीना यदि हमारा अधिकार है तो इसे बेहद खूबसूरत बना कर क्यों न जिया जाए।

हम सभी सामाजिक प्राणी हैं और प्रत्येक जीव,प्रत्येक व्यक्ति प्यार का भूखा होता है और वह उस प्यार को किसी न किसी रिश्ते में अवश्य तलाशता है। जो व्यक्ति आपके जीवन में महत्व रखते हैं आप उन्हें सबसे अधिक प्यार करते हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है ,परंतु कहीं ना कहीं आपके मन में भी प्यार पाने की इच्छा होती होगी और जब वह प्यार आपको नहीं मिलता तो स्वाभाविक रूप से मन परेशान भी होता है ।परंतु जब आप अपने आप को महत्व नहीं देते हैं तो एक समय ऐसा आता है कि दूसरे लोग भी आप पर ध्यान देना बंद कर देते हैं और आपको आपके हालातों पर छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आप उसी हालात में स्वयं को सहज महसूस करते हैं ।

परंतु यहां यह बात बतानी अति आवश्यक है कि जब हम स्वयं को खुश नहीं रख पाते हैं तो अपने से जुड़े किसी रिश्ते में हम खुशियों का रंग नहीं भर पाते हैं और इस वजह से हमारे रिश्ते कमजोर पड़ने शुरू हो जाते हैं। तो रिश्तों को मजबूती प्रदान करने के लिए हमें सबसे पहले स्वयं से प्यार करना सीखना होगा ।स्वयं को को समय अर्थात क्वालिटी टाइम देना होगा। यह सत्य है कि दुनिया में हम जो चाहते हैं वह सभी कुछ तो हमें नहीं मिलता परंतु जिस चीज को हम प्राप्त कर सकते हैं ,जो सुख हमारी पहुंच के भीतर हैं,जिन पर हमारा पूरा अधिकार है ,तो हम उसे क्यों ना प्राप्त करें ,हम क्यों अपने कदम पीछे  हटाएं।चाही अनचाही सभी प्रकार की खुशियों को हमें बिना किसी शर्त के अपनी बांहों में समेट लेना चाहिए एवं स्वयं को सदैव खुश रखने का प्रयास करना चाहिए ।

अपनी गलतियों को हमें उसी प्रकार नजरअंदाज कर उन से सीख लेनी होगी जिस प्रकार हम अपनों द्वारा की गई गलतियों को सहजता से माफ कर देते हैं।स्वयं से प्यार करने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप बेवजह दूसरों में खामियां निकालनी शुरू कर दें, उन पर हावी होना शुरू कर दें एवं आपके भीतर superioity complex जाग उठे ।

खुद से प्यार करने का मतलब यह है कि आप जैसे हैं ,आप उसी रूप में स्वयं को सराहना शुरू करें, दूसरों लोगों से अपनी तुलना करनी बंद करें ,क्योंकि दुनिया में कोई भी दो इंसान एक जैसे नहीं हो सकते ।बड़े बुजुर्गों ने कहा भी है कि जब एक ही मां के पेट से जन्म लेने वाले 2 बच्चे भी एक जैसे नहीं होते ,दोनों अलग-अलग स्वभाव और प्रवृत्तियों के होते हैं तो दुनिया के कोई दो इंसान एक जैसे कैसे हो सकते हैं।इसलिए दूसरों से अपनी तुलना करनी बंद करें। हो सकता है कुछ कमियां दूसरों में हों और आप उनसे अधिक बेहतर हों, साथ ही यह भी हो सकता है कि आप दूसरे लोगों से किसी चीज में कम बेहतर हों।तो इस कम ज्यादा के चक्कर से बाहर निकलना होगा ,अपने आत्मविश्वास को बढ़ाकर अपने व्यक्तित्व में संतुलन लाना होगा।

यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि हम दूसरों के लिए आदर्श बने परंतु दूसरों की नकल करने के बजाय यदि दुनिया में हम अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं तो लोगों के दिलों पर अपनी छाप अवश्य छोड़ते हैं। जब हम स्वयं से प्यार करना शुरू करते हैं तो हमारे भीतर एक नई स्फूर्ति और ऊर्जा का संचार होता है हमारे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, चेहरे पर मुस्कान रखकर जब हम दूसरे लोगों से मिलते हैं तो इससे हमारे व्यक्तित्व का विकास होता है ।इसलिए हमें स्वयं को प्राथमिकता देनी होगी अपने पहनावे रहन-सहन खानपान पर पहले की अपेक्षा अब से अधिक ध्यान देना होगा, क्योंकि यह सब हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी हुई बातें हैं और जब हम अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखेंगे तभी हम अपनी और अपनों से जुड़ी जिम्मेदारियों का ,दायित्वों का, कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन कर पाएंगे। जिस प्रकार हम अपने घर ,अपने परिवार, अपने बच्चों को और अपने मित्रजनों का ध्यान रखते हैं, वैसे ही हमारे प्रति भी हमारी जिम्मेदारी बनती है ।अपनी सेहत से समझौता कर दूसरों का ख्याल रखना समझदारी नहीं कहलाती ।इसलिए 24 घंटे में से कुछ वक्त हमें खुद के लिए निकालना होगा और यही हमारे लिए हमारा स्वयं का सबसे बड़ा गिफ्ट कहलाएगा।

किसी दूसरे के अनुसार अपनी जिंदगी को जीना वैसे ही है जैसे अपने सुख की चाबी किसी दूसरे के हाथ में थमा देना। जी हां, हमें अपने जीवन को स्वयं दिशा देनी होगी ,हमें खुद ही यह निर्णय लेना होगा कि हमें अपने जीवन में क्या करना है और कैसे करना है ।दूसरों की भावनाओं और जजबातों की कदर और सम्मान करने के साथ-साथ हमें अपनी जिंदगी में भी खुशियों के रंग भर उसे खूबसूरत बनाना होगा।

पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग

दिल्ली