बारिशों में ऐसे बचें बीमारियों से

जैसा कि,आप सभी को मालूम है कि देश के विभिन्न राज्यों में मानसून अपनी दस्तक दे चुका है और मौसम दिन प्रतिदिन अपना मिजाज़ बदल रहा है।किसी राज्य में अभी भी काफ़ी अधिक गर्मी है ,तो किसी राज्य में काफ़ी तेज हवाएं चल रही हैं ,किसी राज्य में बाढ़ आ गई है तो वहीं किसी दूसरे राज्य में वर्षा ऋतु में भी सूखा पड़ रहा है ,कहीं बदस्तूर बारिश जा रही है तो कहीं हल्की बूंदाबांदी गर्मी की तपिश को और अधिक बढ़ा रही है। दोस्तों मानसून का अब शायद वह मतलब नहीं रह गया है जो सालों पहले हुआ करता था । उस वक्त मानसून शब्द सुनते ही आंखों के सामने झमाझम बारिश का वह नजारा खुद ब खुद हमारी आंखों के सामने आ जाता था जब कई कई दिन तक लगातार दिन-रात बारिश होती थी, बच्चे स्कूल जाने के लिए छाते और रेनकोट का प्रयोग करते थे ,गलियों में पानी भर जाता था और बारिश इतनी तेज होती थी कि छाता भी साथ नहीं दे पाता था जिसकी वजह से सारे कपड़े बारिश में गीले हो जाते थे ।उस बारिश का भी वैसे अपना एक अलग ही मजा होता था। परंतु देश के विभिन्न राज्यों में आजकल मानसून उस प्रकार का नहीं रह गया है ।कुछ राज्यों को छोड़कर ,देश के अधिकतर राज्यों में मानसून सिर्फ नाम का रह गया है ।मानसून के नाम पर हल्की बूंदाबांदी है जिससे तापमान और अधिक बढ़ जाता है और गर्मी कम नहीं हो पाती।


मानसून अर्थात बारिश अर्थात वर्षा ऋतु ,जी हां दोस्तों ,वर्षा ऋतु में हवा में नमी की मात्रा सामान्य से अधिक होती है जिसकी वजह से हमारे शरीर से निरंतर पसीना बहता रहता है ।ह्यूमिडिटी वाले मौसम में मौसम घुटन भरा होता है जिसमें बीमारियां होने के सबसे अधिक चांस होते हैं।


आज हम बात कर रहे हैं ,बदलते मौसम अर्थात वर्षा ऋतु में हमारे स्वास्थ्य पर क्या-क्या प्रभाव पड़ता है एवं अपने शरीर को मौसम बदलाव की वजह से होने वाली बीमारियों से कैसे बचाया जा सकता है ।


वैसे तो आज के सोशल मीडिया के युग में सभी को सब कुछ पता होता है ,लेकिन फर्क होता है बात पता होने का और बातों को ध्यान में रखकर उन्हें व्यावहारिक जीवन में अपनाने का ।केवल जानकारी रखना ही काफी नहीं होता है दोस्तों !! उस प्राप्त जानकारी का जब तक दैनिक जीवन में व्यवहार में प्रयोग ना किया जाए तो वह जानकारी किसी काम की नहीं होती है ।कभी कभी दूसरे व्यक्ति का अनुभव हमारे लिए कारगर सिद्ध होता है दूसरों के अनुभव से भी हम काफी कुछ सीखते हैं ।कभी कभी किसी का लिखा हुआ अथवा किसी के मुंह से निकला हुआ थोड़ा सा ज्ञान हमारे बहुत काम आता है।


बदलते हुए मौसम के समय हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति कुछ ज्यादा सतर्क रहना जरूरी होता है ,अन्यथा कई बीमारियां हमें घेर लेती हैं। बारिश के मौसम में त्वचा एवं पेट संबंधी बीमारियां सबसे अधिक होती हैं ।इन बातों को ध्यान में रखकर हमें कुछ ऐसे उपाय करने चाहिएं जिससे बारिश के मौसम का मजा लेते हुए हम अपनी सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान दें ताकि हमारे स्वास्थ्य पर मौसम के बदलने का कोई विपरीत एवं नकारात्मक प्रभाव ना पड़े।

चिकित्सकों की मानें तो, बारिश के मौसम में तापमान में अचानक से परिवर्तन आता है जिसकी वजह से खांसी, बुखार, फ्लू जैसी बीमारियां बहुत तेजी से पैर पसारती हैं। बच्चों की प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों से कुछ कम होने की वजह से उन्हें मौसम बदलाव में सबसे अधिक बीमारियां पकड़ती हैं। इसी प्रकार बुजुर्गों को भी मौसम बदलाव में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ।युवा वर्ग के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तुलनात्मक रूप से अच्छी होने की वजह से उन्हें मौसम बदलाव में बीमारियां कम पकड़ती हैं। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य से कम होती है वे लोग जल्दी ही मौसम बदलने से होने वाली बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं।


अगर समय रहते इन बीमारियों से ना बचा जाए एवं इन बीमारियों से बचने के उपायों को न अपनाया जाए तो छोटी सी बीमारी भी गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है ।त्वचा संबंधी बीमारियां दूर रखने के लिए प्रतिदिन स्नान करना अति आवश्यक है ।बारिश के मौसम में अगर दिन में दो बार भी स्नान किया जाए तो भी त्वचा संबंधी रोगों से हम खुद को बचा सकते हैं। बेवजह डिओडरेंट और परफ्यूम इत्यादि का प्रयोग नहीं करना चाहिए ,क्योंकि इनका ज्यादा प्रयोग करने से हमारी स्किन को सांस लेने में तकलीफ होती है ।बारिश के मौसम में पसीना अधिक आता है,इसको समय-समय पर सूती रुमाल अथवा मलमल के कपड़े से साफ करना चाहिए। कई लोग कमीज की आस्तीन से लगातार बार बार अपने माथे का पसीना पोंछते रहते हैं जिससे संक्रमण की संभावनाएं अति प्रबल हो जाती हैं। कहीं बाहर से घर पहुंचने के बाद अगर पसीना आया होता है तो पहले पसीने को सुखाएं ,उसके बाद ही स्नान करें क्योंकि पसीने में स्नान करने से जुखाम एवं खांसी जैसी बीमारियां पनप सकती हैं। शरीर के तापमान को कमरे के तापमान के स्तर पर लाकर ही स्नान करने की सलाह दी जाती है।


वहीं दूसरी ओर ,खांसी जुकाम और फ्लू से बचने के लिए डॉक्टर अलग तौलिया,अलग रुमाल एवं अपनी तथा अपने आस पास साफ सफाई रखने की सलाह देते हैं ।जब भी खांसी हो तो मुंह पर हाथ,टिशू पेपर अथवा रुमाल रखकर ही खांसना चाहिए। खांसी और बुखार होने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवाई नहीं लेनी चाहिए ।समय रहते इन बीमारियों का यदि इलाज करा लिया जाए तो कुछ बड़ी गंभीर बीमारियों से हम अपने शरीर को बचा सकते हैं एवं एक स्वस्थ समाज के योगदान में अपना अभूतपूर्व योगदान कर सकते हैं।


पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग

दिल्ली