तीसरी लहर से निपटने आपातकालीन कोविड पैकेज और 9 माह का रणनीतिक रोडमैप तैयार

गोंदिया - भारत में पिछले डेढ़ वर्ष से हम सभी कोरोना महामारी के तांडव को भुगत रहे हैं, लेकिन 2020 की पहली लहर से इस वर्ष 2021 में दूसरी लहर ने भयानक तांडव मचाया और अधिकतम स्वास्थ्य सेवाओं को ध्वस्त करके कोरोना महामारी ने हमारे हजारों भारतीय परिवारों के सदस्यों को लील गई और अनेकों बच्चों और परिवारों को अनाथ कर गई हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों ने इतनी भयानकता का शायद अंदाजा नहीं लगाया था तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने 7 मार्च 2021 को एक बयान में कहा था कि कोरोना महामारी समाप्त होने पर है। उसके बाद दूसरी लहर शुरू हुई और क्या हुआ हम सब जानते हैं। परंतु फिर भी सरकारों सहित भारत के सभी नागरिक इस कोरोना महामारी से मुकाबला करने में डटे रहे और विश्व को प्रशासनिक स्तर पर सहयोग करने की अपील की गई और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और रुतबे के कारण पूरा विश्व दूसरी लहर में भारत की सहायता और सहयोग करने उमड़ पड़ा जिसके कारण हमने दूसरी लहर पर करीबकरीब नियंत्रण कर लिया है और देश को अनलॉक कर दिया है। परंतु स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा तीसरी लहर के अंदेशे और एसबीआई की एक रिपोर्ट में तीसरी लहर अगस्त के अंत में आने और सितंबर में उसके पीक पर होने की संभावना जताई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीसरी लहर के भय को देखते हुए वैश्विक स्तर पर उसकी रणनीतिक रोडमैप हर देश बना रहे हैं।...साथियों बात अगर हम भारत की करें तो भारत ने दूसरी लहर की विभिषक्ता से गहरी चोट खाया हुआ है और बड़े बुजुर्गों का कहना है वर्तमान की गहरी चोट मनुष्य को भविष्य की कड़ी सुरक्षा का सबक सिखाती हैं। यही कारण है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर की विभीषक्ता और तीसरी लहर के अंदेशे को देखकर सरकारों का चाक-चौबंद और रणनीतिक रोडमैप बनाना जरूरी है...। साथियों बात अगर हम गुरुवार दिनांक 8 जुलाई 2021 को देर रात तक चली मंत्रिमंडल की बैठक की करें तो टीवी चैनलों के अनुसार पीएम ने पर्यटन स्थल पर भीड़ की तस्वीरों पर चिंता जताई और अन्य स्थानों पर बढ़ती भीड़ पर भी चिंता जताई और कहा बिना मासिक घूमना ठीक नहीं है। क्योंकि कोविड नियमों का पालन होना चाहिए। भीड़ को देखकर डर पैदा होता है ऐसा सुखद नहीं। क्योंकि हम अभी कोरोना के खिलाफ लड़ाई पूरे जोरों से लड़ रहे हैं और हमें कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा...। साथियों बात अगर हम जुलाई 2021 से मार्च 2021 के 9 माह के रणनीतिक रोडमैप की करें तो गुरुवार दिनांक 8 जुलाई 2021 को देरशाम तक पीएम की अध्यक्षता में चली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कोविड की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए आपातकालीन कोविड पैकेज को मंजूरी दी गई जिसकी घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देरशाम अपने पीसी में की और देररात प्रेस रिलीज भी जारी की गई उनके अनुसार,कोरोना की तीसरी लहर और बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए पूरी तैयारी की जा रही है। कोविड से लड़ाई के लिए हेल्थ पैकेज का ऐलान किया गया है। कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए 23123 करोड़ रुपए का इमरजेंसी हेल्थ पैकेज की घोषणा की गई है।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 23,123 करोड़ रुपए खर्च करेंगे। देश में 4 लाख से ज्यादा ऑक्सीजन बेड तैयार किए जा रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए स्पेशल पैकेज का ऐलान किया गया है। देश में 2 लाख 44 हजार नए बेड बनेंगे। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के इलाज के लिए विशेष तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार 15, हज़ार करोड़ रुपए देगी और राज्य सरकारें 8, हज़ार करोड़ रुपए देगी। 736 ज़िलों में पीडिएट्रिक यूनिट बनाए जाएंगे। 20 हज़ार ICU बेड तैयार किए जाएंगे। हर ज़िले में 10, हज़ार लीटर ऑक्सीजन स्टोरेज की व्यवस्था की जाएगी। हर ज़िले में एक करोड़ रुपए की दवाईयों का बफर स्टॉक किया जाएगा। 23 हज़ार करोड़ रुपए के इस पैकेज की सारे प्रावधानों को अगले 9 महीनों में अमल में लाया जाएगा।इन आईसीयू बेड को ऐसे बनाया जाएगा जिससे 20 फीसदी बेडों का इस्तेमाल बच्चों के लिए हो सके। उन्होंने कहा सभी 736 जिलों में बाल चिकित्सा इकाइयां स्थापित करनाऔर टेली-आईसीयू सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए हर राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश (या तो मेडिकल कॉलेज, राज्य सरकार के अस्पतालों या एम्स,आईएन आई जैसे केंद्रीय अस्पतालों आदि में) में बाल चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र (बाल चिकित्सा सीओई) की स्थापना, जिला बाल चिकित्सा इकाइयों को सलाह औरतकनीकी सहायता देना होगा। सभी मेडिकल अंतिम साल के छात्रों की सेवाए लेंगे। इस योजना का उद्देश्य बाल चिकित्सा देखभाल सहित स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास और उचित परिणामों पर जोर के साथ शुरुआती रोकथाम, पहचान और प्रबंधन के उद्देश्य से त्वरित प्रतिक्रिया के लिए स्वास्थ्य प्रणालीकी तैयारियों में तेजी लाना है। पिछले साल भी ऐसे ही एक योजना के तहत सरकार ने 15 हज़ार करोड़ रुपए ख़र्च किए थे। पैकेज का फ़ायदा ये हुआ कि देशभर में ऑक्सीजन बेडों की संख्या 50 हज़ार से बढ़कर 4 लाख तक पहुंच गई उन्होंने कहा, हमारा कर्तव्य राज्यों की हर संभव मदद करना है।पैकेज में महत्वपूर्ण दवाओं की आपूर्ति, ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने और भविष्य में बच्चों में कोविड के प्रसार को रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए, जैसे कार्य शामिल हैं। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम देखेंगे कि तीसरी लहर से निपटने, आपातकालीन कोविड पैकेज जो कि 9 माह का रणनीतिक रोडमैप तैयार किया गया है सराहनीय है और कोरोना महामारी दूसरी लहर की विभीषक्ता से सबक लेकर भारत में सभी 736 जिलों का स्वास्थ्य संबंधी रणनीतिक रोडमैप जो तैयार किया गया है वह हमारे स्वास्थ्य संबंधी भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। 

-संकलनकर्ता पर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र