12वीं कक्षा के परिणाम की जांच करवा सकती है हिमाचल प्रदेश सरकार

राज्य स्कूल शिक्षा की ओर से बीते दिनों जारी किए गए 12वीं कक्षा के परिणाम की हिमाचल प्रदेश सरकार जांच करवा सकती है। सरकारी स्कूलों के अधिक विद्यार्थियों के फेल होने और कम अंक आने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए तय किए गए आठ बिंदुओं की सरकार दोबारा से समीक्षा करवा सकती है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि अगर लगेगा कि किसी विद्यार्थी से भेदभाव हुआ है तो उसे दुरुस्त करते हुए खामियों को दूर किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस मामले को लेकर जल्द बोर्ड और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने विगत बुधवार को 12वीं कक्षा का वार्षिक परिणाम घोषित किया है। 10वीं और 11वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम, 12वीं कक्षा के फर्स्ट और सेकेंड टर्म, प्री बोर्ड, प्रेक्टिकल और अंग्रेजी विषय की अप्रैल में आयोजित परीक्षा के अंकों को आधार बनाया है। कोरोना महामारी के चलते इस बार बिना वार्षिक परीक्षाएं लिए घोषित रिजल्ट 92.77 फीसदी रहा। 1 12वीं की बोर्ड परीक्षा में साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों संकायों के लिए 1,00,799 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें से 93,438 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, 702 परीक्षार्थियों को कंपार्टमेंट आई है, जबकि 5221 फेल हुए हैं।

निजी स्कूलों के महज 31 और सरकारी स्कूलों के 5190 विद्यार्थी इस बार फेल हुए हैं। परीक्षा परिणाम में 31 विद्यार्थियों ने 99 फीसदी अंक हासिल किए हैं। 3.64 फीसदी के 90 से 100 प्रतिशत के बीच अंक हैं। 90 से 100 प्रतिशत अंक पाने वालों में सरकारी स्कूलों से 166 छात्र, जबकि 459 छात्राएं शामिल हैं। वहीं निजी स्कूलों से 1123 छात्र और 1931 छात्राएं हैं। इससे पहले वर्ष 2020 में 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 76.07 प्रतिशत रहा था, वर्ष 2019 में परिणाम 62.1 फीसदी रहा था। सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम बोर्ड के मापदंड पर खरा नहीं उतरा है जबकि निजी स्कूलों ने इसमें बाजी मारी है। ऐसे में इसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

 शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क सही नहीं होने के चलते विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायतें मिली हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए जल्द सभी टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। इस समस्या को दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमजोर मोबाइल नेटवर्क वाले स्कूलों की सूची भी शिक्षा विभाग से मांगी गई है।