भगवान राम मंदिर के जमीन विवाद पर रणदीप सुरजेवाला का PM और योगी से ये सवाल

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि खरीद में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद राजनीति तेज हो गई है. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल इस मामले को उठा रहे हैं. कांग्रेस ने रविवार को एक और जमीन खरीद मामले को लेकर बीजेपी पर सवाल उठाया. कांग्रेस के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को ब्रीफिंग में कहा कि राम मंदिर की जमीन खरीद में 79 दिनों में 1250 प्रतिशत बढ़ोत्तरी से साफ है कि हेराफेरी व महापाप हुआ है. इसमें भाजपाई नेता शामिल हैं. 

सुरजेवाला ने दावा किया कि नए सनसनीखेज खुलासे से मंदिर की जमीन खरीदने में करोड़ों का घोटाला जगजाहिर हुआ. दीप नारायण उत्तर प्रदेश का भाजपाई नेता है तथा भाजपा आईटी सेल से जुड़ा है. यह उसके फेसबुक प्रोफाइल से भी साफ है. दीप नारायण अयोध्या के भाजपा के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का रिश्ते में भांजा भी लगता है. यह भी सर्वविदित है कि ऋषिकेश उपाध्याय नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ के चहेते हैं. 

उन्होंने दावा किया 20 फरवरी 2021 को दीप नारायण ने अयोध्या में ''हवेली अवध'' के नाम से 890 वर्गमीटर भूमि 20 लाख रुपये में खरीदी. यानि भूमि का खरीद रेट 2,247 रुपये प्रति वर्गमीटर है, जबकि सेल डीड के मुताबिक ही भूमि का कलेक्टर रेट 4,000 रुपये प्रति वर्गमीटर है. मात्र 79 दिन के बाद यानि 11 मई, 2021 को भाजपा नेता, दीप नारायण ने यह भूमि ‘‘श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र मार्फत चंपतराय'' को ₹2,50,00,000 (ढाई करोड़ रु.) में बेच दी. भूमि का खरीद रेट 28,090 रु. प्रति वर्गमीटर है, जबकि सेल डीड के मुताबिक, भूमि का कलेक्टर रेट 4,000 रुपये प्रति वर्गमीटर है. तो फिर भगवान राम के मंदिर के चंदे को इतनी बड़ी चपत क्यों और कैसे लगी?

राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट की ओर से चंपतराय, सचिव ने भूमि खरीदी तथा राम मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठे किए गए पैसे से भुगतान किया. एक और ट्रस्टी अनिल मिश्रा, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रांत कार्यवाहक भी रहे, ने बतौर गवाह दस्तखत किए. क्या चंपतराय व अनिल मिश्र द्वारा राम मंदिर के चंदे के पैसे से भुगतान करने के पहले यह जांच की गई कि किस वजह से 2,247 प्रति वर्गमीटर में खरीदी हुई जमीन 28,090 रुपये प्रति वर्गमीटर हो गई? 12.5 गुना अधिक राशि का भुगतान क्यों और कैसे किया गया? 

इससे पहले भी तथ्य सामने आए हैं कि 18 मार्च 2021 को दो करोड़ में खरीदी गई जमीन श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मार्फत चंपतराय द्वारा 18.5 करोड़ में खरीदने का इकरारनामा कर पैसे का भुगतान किया गया. इन रजिस्टर्ड सेल डीड पर भी अनिल मिश्रा, ट्रस्टी बतौर गवाह मौजूद रहे. भाजपा नेता व अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय भी बतौर गवाह मौजूद रहे. यहां भी राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को जमीन बेचने वाले रवि मोहन तिवारी, भाजपा के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के रिश्तेदार हैं. 

सुरजेवाला के बयान के मुताबिक नृत्यगोपाल दास जी ने कहा कि एक साल से उनको चंदे का पता ही नहीं, सब चंपत राय जी देख रहे हैं. तो जब चेयरमैन को पता ही नहीं तो ये सब कर कौन रहा है? किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं दे रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योदी आदित्यनाथ से पांच सवाल:-

1. क्या कारण है, कि भगवान राम के मंदिर निर्माण के चंदे की खुली लूट करने वाले पापियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने के बारे में मोदी - आदित्यनाथ जी पूरी तरह से चुप हैं? 

2. क्या पीएम-सीएम देश को बताएंगे कि 79 दिनों में जमीन की कीमत 1250 प्रतिशत कैसे बढ़ी?

3. जब भाजपा सरकार द्वारा भूमि की कीमत मात्र 4000 रु. प्रति वर्गमीटर आंकी गई, तो फिर राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने इसे 28,090 रु. प्रतिवर्ग मीटर में क्यों खरीदा?

4. क्या भाजपा नेता राम मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठे किए गए चंदे को चूना लगा, मुनाफे की लूट में लगे हैं?

5. राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए हजारों करोड़ के चंदे में कितनी और रजिस्ट्रियों में खुली लूटपाट हुई है? क्या सुप्रीम कोर्ट के तत्वाधान में पूरे मामले की जांच व पैसे के लेनदेन का ऑडिट कर सारे तथ्य देशवासियों के समक्ष नहीं रखे जाने चाहिए?  मोदी-योगी सरकारें जान लें कि राम नाम के नाम पर की गई लूट ‘‘रामद्रोह'' है. 

मंदिर के लिए कांग्रेस ने कितना चंदा दिया?

इस सवाल पर सुरजेवाला ने कहा कि सवाल यह भी है कि मोदी, शाह, नड्डा ने कितना चंदा दिया? लेकिन बात व्यक्तियों की नहीं है. लाखों कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा से जुड़े लोगों और गैर राजनीतिक लोगों को भगवान राम के नाम पर विश्वास है, लेकिन बीजेपी सवालों को बन्द करवाना चाहती है. भगवान राम का चंदा जो खाएगा उसके नर्क लोक में भी जगह नहीं मिलेगी.