तुम्हारा मिलना क़िस्मत है मेरी

तुम्हारा मुझसे मिलना , किस्मत  है  मेरी,

तुम्हारा  साथ  चलना , हिम्मत  है   मेरी।

तुम मुस्कुराते  हो , मैं खिल सी जाती हूं,

तुम्हारा हमसफ़र बनना, हकीकत है मेरी।

तुम दूर हो या पास हो, कुछ फर्क नहीं,

तुम्हें पल-पलमहसूस करना,इबादत है मेरी।

तुम्हारे बिन न कटेअब,रातऔरदिन सनम,

रब मेरी सदा सुनना, कुबूल मन्नत है मेरी।

बहुत खुश हूं ,साथ तुम्हारा पाकर ऐ दिल,

बस  साथ  बने  रहना , इज्ज़त  है  मेरी।

अनुपम चतुर्वेदी,सन्त कबीर नगर,उ०प्र०