मधु मिलन की चाह में

झुरमुटों के बीच चारु चंचल चांद खिला है।

हृदय में छिटकी चांदनी मधुर साज मिला है।

प्रेमी-उर मचले मिलन को सुवासित मन लिए,

मन गा रहे प्रेम रागिनी सुर साथ मिला है।।


ज्योत्स्ना में विरह से दमित दग्ध तन-मन हुआ।

नीरस निर्गंध निलय अब सुरभित उपवन हुआ।

मन बांसुरी से फूटे वेदना के स्वर सभी,

बहार पतझड़, तप्त चंदन, शुष्क सावन हुआ।।


युगल मन व्याकुल हुए मधुर मिलन की चाह में।

कर कंगन-चूड़ियों की खनक विमल उछाह में।

पायलों की ध्वनि मधुर लालसा उर संजोए,

हृदय कमल खिल रहे हैं मलय पवन प्रवाह में।

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प्रमोद दीक्षित मलय

शिक्षक, बांदा (उ.प्र.)