हर चेहरे के पीछे है

झूठ ने बाँध लिया है,खुशियों का सेहरा।

हर चेहरे के पीछे है, छिपा  कई  चेहरा।

बनके  हमदर्द सामने जो  कभी आते हैं,

बाद  पीछे  से  वही  छुरियां  चलाते  हैं।

देते हैं धोखा वहीं,जिनसे है रिश्ता गहरा,

हर  चेहरे  के  पीछे  छिपा  कई  चेहरा।

कोई यहाँ दर्द को मुस्कान  से छुपाता है,

कोई अपनो को चोट देके  मुस्कुराता है।

वक्त भी आज देखो,आके है कहाँ ठहरा,

हर  चेहरे  के  पीछे  छिपा   कई  चेहरा।

चेहरा   एक   मुखौटा   कई   लगाते  है,

सच   को  झूठे  नकाब   से  छिपाते  है।

किसके दिलमे है क्या,कौन करेगा पहरा,

हर  चेहरे  के  पीछे   छिपा  कई  चेहरा। 


अलका केशरी 'आरिया' वरिष्ठ कवयित्री 

व शिक्षिका,स्वतंत्र लेखिका व स्तम्भकार,

सोनभद्र-उत्तर प्रदेश-6394383797