मिल्खा सिंह

ज़िंदगी एक दौड़ है,

ये मिल्खा ने हमें बताया,

फ्लाइंग सिख का लक़ब,

उन्होंने था पाया।


20 नवंबर 1929 को जन्मे

गोविंदपुरा(पाकिस्तान)में,

विभाजन के समय भारत आकर,

भारत माँ की शान बढ़ाया।


परिस्तिथियों से हताश

इक क्षण को सोचा डाकू बनने का

पर आत्मा ने ललकारा उन्हें,

जगत में ऊँचा नाम करने का।


अनुशासन और परिश्रम के

अद्भुत वे मिशाल थे,

चीर दे जो चट्टानों को

पारावार वो विशाल थे।


18 जून 2021 का दिन

वह उदासी लेकर आया,

चले गये मिल्खा इस धरा से,

व्योम में ध्रुवतारा जगमगाया।


क्षति उनकी कैसे हो सकती है पूरी?

खेल जगत के थे वे सुदृढ धूरी।


रीमा सिन्हा(लखनऊ)