ई-कॉमर्स साइट्स पर फ्लैश सेल बैन करने की कोई योजना नहीं

ई-कॉमर्स साइटों पर फ्लैश बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की कोई योजना नहीं है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि केंद्र फ्लिपकार्ट, अमेजन और ऐसी अन्य साइटों पर फ्लैश बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं सोच रहा है।  फ्लैश सेल के जरिए कंपनियां सीमित समय के लिए भारी छूट का ऑफर देती हैं। बता दें एक दिन पहले खबर आई थी कि सरकार उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम- 2020 में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके लिए आम लोगों और दूसरे पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। दरअसल ई-कॉमर्स पोर्टल पर ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए कई नए प्रावधान सुझाए गए हैं। इसमें इन पोर्टल पर धोखाधड़ी पूर्ण बिक्री, भारी छूट और गलत तरीकों के खिलाफ प्रावधान शामिल हैं। इससे जुड़े सुझाव 6 जुलाई तक दिए जा सकते हैं।

सरकार इसके अलावा इंटरनेट पर खोज परिणामों में हेराफेरी करके उपयोगकर्ताओं को गुमराह करने पर प्रतिबंध और मुख्य अनुपालन अधिकारी एवं निवासी शिकायत अधिकारी की नियुक्ति सहित कुछ अन्य संशोधनों पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों में ई-कॉमर्स संस्थाओं को किसी भी कानून के तहत अपराधों की रोकथाम, पता लगाने और जांच और अभियोजन के लिए सरकारी एजेंसी से आदेश प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर सूचना प्रदान करनी होगी। उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम- 2020 को पहली बार पिछले साल जुलाई में अधिसूचित किया गया था। इसके उल्लंघन में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम- 2019 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार ई-कॉमर्स संस्थाओं को उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में पंजीकरण कराने की योजना भी बना रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने एक सार्वजनिक सूचना में कहा, ‘प्रस्तावित संशोधनों पर विचार/ टिप्पणियां/ सुझाव 15 दिनों के भीतर (6 जुलाई, 2021 तक) ईमेल द्वारा वेबसाइट पर भेजे जा सकते हैं। सरकार ने एक अलग बयान में कहा कि उसे पीड़ित उपभोक्ताओं, व्यापारियों और संघों से ई-कॉमर्स प्रक्रिया में व्यापक धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ शिकायत के कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।

मंत्रालय ने हालांकि कहा कि पारंपरिक तौर पर आयोजित होने वाली ई-कॉमर्स रियायती बिक्री पर प्रतिबंध नहीं होगा। केवल विशिष्ट तौर पर ग्राहकों को घेरने के लिहाज से की जाने वाली बिक्री या बार-बार फ़्लैश बिक्री, कीमतों में वृद्धि करती है तथा सबके के लिए एक समान अवसर वाला मंच उपलब्ध कराने से रोकती है( ऐसी बिक्री की अनुमति नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में ई-कॉमर्स कंपनियां कंपनी अधिनियम, भारतीय भागीदारी अधिनियम या सीमित देयता भागीदारी अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं न कि डीपीआईआईटी के साथ अलग से। मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में पारदर्शिता लाना और नियामक व्यवस्था को और मजबूत करना है।

वहीं उपभोक्ता मंत्रालय ने साफ किया है कि जहां तक उन्हें पता है फ्लैश सेल्स और डिस्काउंट सेल्स की अनुमति है। सिर्फ कुछ खास तरह का फ्लैश सेल्स को लेकर ड्राफ्ट में विचार किया जाएगा।उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम- 2019 23 जुलाई 2020 को सरकार ने ई-कॉमर्स के लिए उपभोक्ता संरक्षण नियम को अधिसूचित किया था। इसमें बदलाव के लिए लोगों की राय उनके, विचार और सुझाव मांगे गए हैं। इसके लिए 15 दिनों का वक्त दिया गया है।