तुमसे दूर जाना चाहता हूं

तुमसे दूर जाना चाहता हूं

ऐ बेबसी तुमसे मैं दूर जाना चाहता हूं

ऐ लाचारी तुमसे मैं दूर जाना चाहता हूं

मन में किसी के लिए 

नहीं घृणा लाना चाहता हूं

अपने जज्बातों को अपने 

काबू में रखना चाहता हूं

बेमतलब के रीति-रिवाजों से 

दूर जाना चाहता हूं

अहंकार को ना जीवन में 

लाना चाहता हूं

हां,अपने स्वाभिमान के लिए

 उनसे दूर जाना चाहता हूं

नहीं देना चाहता किसी के 

जीवन में पीड़ा

क्योंकि खुदगर्जी से मैं 

दूर जाना चाहता हूं

मानव हूं इसलिए मानव 

जैसा रहना चाहता हूं

दानवों से कहीं दूर जाना चाहता हूं

देख रहा हूं समाज के ठेकेदारों को  

इसलिए इन गुनाहगारो से 

दूर जाना चाहता हूं

आंखें होकर भी जो है अंधे

उसके संस्पर्श से भी 

दूर जाना चाहता हूं

मैं इंसान हूं इसलिए तुम लोगों से

 दूर जाना चाहता हूं।


डॉ जानकी झा,अध्यापिका

कटक-ओडिशा