अतीत के पूर्वाग्रह से ग्रसित इंसान

दुनिया भर के लोग आज की तरह ही

करते रहे हैं अतीत में भी

अपने पूर्वजों की महानता का बखान,


अपनी जाति, धर्म, सम्प्रदाय के

महापुरुषों का तो ज्यादातर

किया गया है अतिरंजनापूर्ण व्याख्यान,


जो किया गया इस बात का रखकर ध्यान

कि आने वाली पीढ़ियां प्रेरित होकर उनसे

खुद को बनाए उनसे भी ज्यादा ज्ञानवान,


विशेषकर राजाओं में तो

वीरता किसी की बताई गई है

तीनों लोक में अतुलनीय

तो अच्छाई में बता दिया गया है किसी को

साक्षात् ईश्वर से भी ज्यादा महान,


मगर याद रखें

यह सब लिखा है जिन महानुभावों ने

उन्हें मिलता था अपने राजा की

प्रशंसा के लिए खूब दान और सम्मान,


इनमें हैं बहुत से उदाहरण ऐसे भी

जिन्होंने अपने जीवनकाल में सहे कष्ट ही

बनकर साधारण इंसान

लेकिन मरने के सदियों बाद

मान लिया गया उन्हें दुनिया में भगवान,


सच्चाई यही है कि जीते जी अच्छे लोगों की

कद्र कम ही करता आया है इंसान,

ज्यादातर मरने के बाद ही उनके

उनकी खूबियों का किया जाता है यशोगान,


आज के दौर में हम जितना भी कर लें

अपने अतीत के वैभव और गौरव का गुणगान

उससे हो नहीं जाएगा किसी तरह आज

हमारे समक्ष खड़ी समस्याओं का समाधान,


किसी भी तरह के पूर्वाग्रहों से ग्रसित हुए बिना

अतीत की गलतियों से सीख पाएगा जो इंसान,

वही कर पाएगा ख़ुद के लिए व देश के लिए

एक बेहतर आज और गौरवशाली कल का विधान।


जितेन्द्र 'कबीर'

संपर्क सूत्र - 7018558314