मकान बनाना हुआ और महंगा, अब सीमेंट के दाम भी ऊंचे

पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेलों की कीमतें वैसे ही आसमान छू रही हैं, अब सीमेंट भी आंखें दिखाने लगा है। मकान बनवाने वालों के लिए घर की लागत स्टील की महंगाई के बाद अब सीमेंट के ऊंचे दाम से बढ़ जाएगी। देशभर में जून में सीमेंट की कीमतों में तेजी आई है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज द्वारा लेटेस्ट डीलर्स चैनल चेक से पता चला है कि अखिल भारतीय कीमतें महीने-दर-महीने (m-o-m) आधार पर 4% बढ़कर ₹376 प्रति 50-किलोग्राम हो गई हैं। अगर दक्षिण भारत में सीमेंट की कीमतों की बात करें तो महीने-दर-महीने के आधार पर 11% की वृद्धि के साथ ₹415 प्रति बैग हो गया है।

कीमतों में तेजी की वजह  मांग में वृद्धि है। डीलरों का कहना है कि बाजारों के फिर से खुलने, राज्य सरकार की परियोजनाओं जैसे स्कूलों, सड़कों और किफायती आवास और टियर 1- टियर 2 शहरों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को फिर से शुरू करने के कारण सीमेंट की मांग बढ़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2021 में पिछली बढ़ोतरी के बाद दक्षिण को छोड़कर, अखिल भारतीय स्तर पर कीमतें सपाट रहीं।

वहीं सीमेंट बनाने में प्रमुख सामग्री पेट्रोलियम कोक (पेट कोक) और कोयले की कीमतों में जारी वृद्धि के कारण सीमेंट क्षेत्र हाल के दिनों में लागत दबाव से जूझ रहा है। इस साल की पहली तीमाही में पेट कोक की कीमतें 130 डॉलर प्रति टन पर स्थिर हो गई हैं, लेकिन क्रमिक रूप से 14% ऊपर हैं। इसी तरह, वित्त वर्ष 2021 की मार्च तिमाही की तुलना में अंतरराष्ट्रीय कोयले की कीमतों में 16% की वृद्धि हुई है। वहीं डीजल के महंगे होने से इस क्षेत्र के लिए माल ढुलाई लागत भी बढ़ गई है।

सीमेंट कंपनियों ने अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को बचाने के लिए मार्च में कीमतों में बढ़ोतरी की थी। Q4FY21 में, प्रमुख सीमेंट निर्माताओं के मार्जिन को भी कम लागत वाली इन्वेंट्री और ऑपरेटिंग लीवरेज द्वारा सहायता मिली थी।वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही मानसून के मौसम में आती है और इसलिए यह मौसमी रूप से कमजोर तिमाही है। डीलरों का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से सीमेंट की कीमतें जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान 2-3% करेक्ट होती हैं, लेकिन इस बार पहली तिमाही लॉकडाउन से प्रभावित हुई, इस वजह से इसकी रिकवरी डिमांड के रूप हो रही है। आने वाले समय में कीमते स्थिर होनी चाहिए।