आईना के दोहे

सच कहता है आईना,जानें यह सब लोग।

झूठ-कपट से दूर वह,नहीं पालता रोग।।


सच की झाँकी पेश कर,देता है संदेश।

नहीं मलिनता संग है,माने सारा देश।।


टुकड़ों में बँट जाय तो,तो भी है निर्भीक।

सच कहता,पर दृष्टि है,सचमुच बेहद नीक।।


दर्पण कह लो,या कहो मिरर उसे तुम आज।

पर नेचर है सत्य का,माने सदा समाज।।


सामाजिक दायित्व का,करता जो निर्वाह।

आईना तो देव है,सचमुच लगता शाह।।


आईना तो पूज्य है,सच का बना गवाह।

बतलाता जो झूठ को,हरदम सच की राह।।


आईने को देखकर,कर निज मुखड़ा साफ़।

वरना गंदापन रहे,कौन करेगा माफ़।।


प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे

प्राचार्य

 शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय

मंडला(मप्र)-481661

(मो.9425484382)