॥ हकीकत ॥

हाे सके तो जीवन में कभी

अतीत को याद मत करना

मन भारी हो जाने पर ये

दिल को दुःख पहुँचाता है


जिस गाँव में हमको नहीं है जाना

उसकी कोस क्यूँ गिनना है

मंजिल सामने जो दीख रहा है

आगे मंजिल पे ही बढ़ जाना है


सोंच समझ कर कदम बढ़ाना

सामने ठोकर मत खाना तुम

ठोकर हिम्मत चूर कर देता है

संभल संभल कर चलना तुम


जाति पाँति में समाज बँट जाता

जाति की बंधन में ना बँधना है

समाज तोड़ने की चाहत में

कोई गलत चाल ना चलना तुम


भले ही दौलत तुँ  दे ना पाओ

संस्कार बच्चे को जरूर ही देना

संस्कार सभ्यता की खुशबू है

खुशहाली का पाठ पढ़ाना


कोई गर तेरे साथ ना आवे

फिर भी सफर जारी रखना

इक दिन मुकाम मिल जायेगा

बाँकी को है घर पर ही रहना


कोई किसी का नहीं है जग में

फिर भी अकेला ही चलना

दुनियाँ मतलब की मूरत है

विरोध की परवाह मत करना


उदय किशोर साह

मो० पौ ० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088