योग करे हमें निरोग

मन की कुलांचे,योगी ही जांचें 

 काया की माया में है,मन का अधिकार।

काया को क्षीण कर,मन पैदा करे विकार।।

काम, क्रोध,मद,लोभ को पाकर,खिल जाती हैं इसकी बांछें।

मन की कुलांचे..............................।।1।।



जब  तन हो जाए  पस्त,मन हो जाता है मस्त।

बुद्धि , ज्ञान और योग से,मन पा जाता शिकस्त ।

कर्म योग और ध्यान क्रिया से योगी जैसा  चाहे,मन वैसा नाचे । 

मन की कुलांचें ............................।।2।


आओ सब मिल कर योग करें,

 प्रातःकाल नित  ध्यान करें ।

बल, बुद्धि, विवेक बढ़ाये योग  आत्मा को बाचे।

मन की कुलांचे............................।।3।।


4- योग में बहुत भक्ति है और ज्ञान भंडार।

बहुत ऊर्जा विज्ञान है भैया  इसमें शक्ति  अपार ।

आओ मिल कर सब योग करें हो जाये अच्छी दिन और रातें ।

।मन की कुलांचे...... ...................।।4।।


मुल्क मंजरी

 भगवत पटेल

2/C-9, वृन्दावन कालोनी ,

 लखनऊ