ज़िन्दाबाद - हाईकोर्ट, ज़िन्दाबाद - सुप्रीमकोर्ट, ज़िन्दाबाद - राजनाथ शर्मा

मैंने आज एक सपना देखा कि पाकिस्तान में कोरोना की वजह से चारो तरफ मौत ताण्डव कर रही है। इसे लेकर लोकतंत्र के बड़े बड़े बड़े सूबेदार और वजीर लोक से ही बच कर रह रहे हैं। तन्त्र अपने तन्त्र में छुपकर रह रहा है। उसका काम केवल निर्देश जारी करना और आपदा में अवसर तलाशना रह गया है। 

इससे आगे निकलने पर जो राज्यों के राजा महराराजाओं के  तांत्रिक हैं, वह हालात के लिए देश के महाराज और उनके नवरत्नों को टारगेट कर रहे हैं और देश के महाराज के नवरत्न राज्यों के राजा महाराजाओं और उनके तांत्रिकों को दोषी बता रहे हैं। 

आम आदमी को छोड़िए, कोरोना की डर से राजा, महाराजा भी  कोरेन्टीन हो रहे हैं। बड़े महाराज तो राजधानी में अपने लिए करोड़ों करोड़ खर्च कर एक ऐसा बंकर बनवा रहे हैं जिसमें सारी सुविधाएं रहें।

हालात को लेकर पाकिस्तान का हाईकोर्ट सजग है, पाकिस्तान का सुप्रीमकोर्ट भी सजग है। कोर्ट से राजाओं और महाराजाओं को लगातार फटकार मिल रही है, कुछ करो लेकिन राजा महाराजाओं पर इसका कोई असर नहीं हैं।

दुखद स्थिति यह है कि पाकिस्तानी लोकतंत्र के वुड बी राजा महाराजा भी इसे लेकर अपने अपने महल से केवल ट्वीट कर रहे हैं। फिर भी हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट का यह साहस सराहनीय तो है ही। इसे लेकर  उँगलियाँ में कम्पन हुआ और वह खुद लिखने लगीं, ज़िन्दाबाद - हाईकोर्ट, ज़िन्दाबाद - सुप्रीमकोर्ट।

उँगलियों के चलाने में ही मेरी नीद खुल गई। 

अभी सपने के बारे में सोच ही रहा था कि महात्मा गाँधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट, बाराबंकी के अध्यक्ष समाजवादी योद्धा राजनाथ शर्मा का फोन आ गया। 

आशीर्वाद के साथ उन्होंने पूछा, बाराबंकी चलना है क्या ? 

मैंने पूछा कि आज फिर लखनऊ आए हैं क्या ?

बोले, सुभाष मिश्रा जी ( वरिष्ठ पत्रकार जिनका कल कोरोना की वजह से निधन हो गया ) के लड़के का फोन आया था कि क्रिया कर्म के लिए पण्डित नहीं मिल रहा है। इसलिए बाराबंकी से पण्डित लेकर आया हूँ। याद रहे राजनाथ जी कल सुभाष मिश्रा जी के अंतिम संस्कार में भी शामिल होने के लिए बाराबंकी से लखनऊ आए थे और उनकी चिता को प्रणाम करते देखे गए।

राजनाथ शर्मा जी 77 वर्ष के हैं। घुटनों का ऑपरेशन हो चुका है। दो बार उन्हें गम्भीर स्थिति में देख चुका हूं। ईश्वर की कृपा से वह इस समय ठीक हैं।

हालात किसी से छुपे नहीं हैं। कोरोना के डर से वह लोग भी बाहर नहीं निकल रहे हैं जिनकी पहचान पंजे पर छप्पर उठा लेने की है। और राजनाथ जी इस माहौल में महात्मा गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट परिसर में रोज आते हैं, लोगों से मिलते हैं और लोगों की मदद के लिए खड़े रहते हैं। मित्रों के लिए किसी हद तक। वह किसी भी परिचित की मिट्टी हो, उसमें जरूर शामिल होते हैं।

इस माहौल में भी। इसलिए लिखने को विवश हूँ,

ज़िन्दाबाद - राजनाथ शर्मा - ज़िन्दाबाद।

इसके साथ ही एक प्रार्थना कि ईश्वर समाजवादी योद्धा राजनाथ शर्मा और उनके परिजनों की रक्षा करे, उन्हें स्वस्थ रख्खे।

सपने की चर्चा करने के लिए पाकिस्तान के नागरिकों से क्षमा के साथ -

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

सम्पादक

राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक

लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक

अभी उम्मीद ज़िन्दा है

चित्र- एक मई 2021 का है