#तुम्हारे लिए

आज कई दशकों बाद लिखने के लिए..

मैंने कलम उठाई है !

वैसे तो कलम कभी छूटी ही नहीं थी..

मेरे हाथ से !

पहले भी लिखती थी बच्चों की कॉपियां..

और क्लास के बोर्ड पर !

पर आज.. उठाई है कलम लिखने को..

कुछ और !

दशकों पहले लिखा करती थी..

मन की भावनाओं को कागजों पर..

शब्दों का रुप देती !

आज फिर बरसों बाद दबी सी..

एक आवाज़ आई !

तन्हाइयों से बाहर आ और लिख..

पहले भी लिखा करती थी तुम्हारे लिए..

आज फिर से उठाई है कलम सिर्फ..

तुम्हारे लिए !!


परिचय- रीता मिश्रा तिवारी

शिक्षिका, भागलपुर, बिहार 812003

मो. 9234719261