कोरोना काल में गंगा-यमुना नदी में बहते हुए मिले शव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने जताई चिंता

नई दिल्ली: कोरोना वायरस ने अब गांवों की ओर भी रुख कर लिया है. हालात यह हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार में शव अब श्मशानों के बजायों नदियों में तैरते नजर आए हैं. इससे संक्रमण फैलने का खतरा और अधिक बढ़ गया है. ऐसे ही कुछ शव गंगा और यमुना नदी में बहते हुए पाए गए हैं. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस पर चिंता जताते हुए ट्वीट किया है. उन्‍होंने कहा कि राज्‍यों को ऐसी घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए इस बारे में पूरी जांच करानी चाहिए. शेखावत ने अपने ट्वीट में लिखा, 'बिहार के बक्सर क्षेत्र में मां गंगा में तैरते मिले शवों की घटना दुर्भाग्यजनक है. यह निश्चित ही पड़ताल का विषय है.मां गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए मोदी सरकार प्रतिबद्ध है. यह घटना अनापेक्षित है. संबंधित राज्य इस संदर्भ में तुरंत संज्ञान लें.' देश में कोरोना के केसों में कमी आई है लेकिन अभी भी प्रतिदिन तीन लाख से अधिक केस दर्ज हो रहे हैं.मंगलवार यानी 11 मई की सुबह 8 बजे तक पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 3,29,942 नए केस सामने आए हैं और इस अवधि में 3,876 मरीजों की मौत हुई है. स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे में 3,29,942 नए मामले दर्ज हुए हैं, इस अवधि में 3876 लोगों को जान गंवानी पड़ी है. देश में कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्‍या इस समय 3,71,5221 हैं. पॉजिटिविटी रेट इस समय 17.83% है. गौरतलब है कि हाल ही में संदिग्ध कोरोना संक्रमितों का शव यूपी की सीमा से सटे बिहार के बक्सर जिले के चौसा के समीप नदी में सोमवार को बहता हुआ पाया गया. चौसा के प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक कुमार ने न्‍यूज एजेंसी भाषा को बताया कि स्थानीय चौकीदार द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने पर हमने अब तक इनमें से 15 शव बरामद कर लिए हैं. मृतक में से कोई भी बक्सर जिला के निवासी नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उस पार उत्तर प्रदेश के कई जिले नदी के किनारे स्थित हैं और हो सकता है कि वहां शवों को गंगा में बहा दिया गया जो हमें नहीं पता. उधर यूपी के हमीरपुर जिले में यमुना नदी में शव नजर आने के बाद लोगों में दहशत फैल गई और यह संदेह भी जताया गया कि यह कोविड-19 से जान गंवाने वालों की लाशें हैं. हालांकि, सोमवार को जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया. हमीरपुर के जिलाधिकारी ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, ‘‘ लोगों से बातचीत तथा शव को देखने से प्रथम दृष्टया ये कोरोना वायरस से हुई मृत्यु से संबंधित नहीं पाए गये, क्योंकि शव के ऊपर सामान्य परंपरागत शवों के कपड़े थे और किसी भी शव पर कोरोना से मृत्यु होने पर की जाने वाली पैकिंग नहीं थी.''