कहीं भारी न पड़ जाए लॉकडाउन का उल्लंघन

लखनऊ। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने 1 अप्रैल 2021 के बाद उत्तर प्रदेश समेत समूचे भारत को हिला कर रख दिया। 2020 के मुकाबले उत्तर प्रदेश में 2021 का अप्रैल महीना इंसानी जानों के लिए विनाशकारी महीना साबित हुआ लेकिन राज्य सरकार ने प्रदेश की 23 करोड़ जनता को भुखमरी से बचाने के लिए कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए काफी सोच विचार करने के बाद आंशिक लॉकडाउन लागू किया। लॉकडाउन के लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कोरोना महामारी पर लगाम लगती नजर आई लेकिन पिछले 2 दिनों से राजधानी लखनऊ के पुराने लखनऊ से जनता के द्वारा लॉकडाउन के उल्लंघन की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वह चिंता बढ़ाने वाली तस्वीरें हैं। पुराने लखनऊ के अनेक गली मोहल्ले और  सड़कों पर भले ही दुकाने पूरी तरह से बंद है लेकिन सब्जी के ठेले आवश्यक वस्तुओं की दुकानें सरकारी गाइडलाइन के अनुसार खुली हुई हैं लेकिन सड़कों पर भीड़ इस तरह दिख रही है कि मानो लॉकडाउन सिर्फ बाजार बंद करने के लिए लागू किया गया हो। लॉकडाउन के उल्लंघन की चिंताजनक तस्वीरें वैसे तो नए लखनऊ में भी देखने को मिली लेकिन पुराने लखनऊ के मुकाबले नए लखनऊ में वो हालात नहीं है। पुराने लखनऊ का चैक , ठाकुरगंज, नखास, सहादतगंज, बाजार खाला, हैदरगंज ,अमीनाबाद, पारा आदि तमाम क्षेत्रों में लोग अब बिना रोक-टोक अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं यहां तक की ई-रिक्शा भी सड़कों पर सवारियां बैठाकर फर्राटे भरने लगे हैं हालांकि गुरुवार को पुराने लखनऊ की सड़कों पर पुलिस सक्रिय नजर आई और सड़क से गुजर रहे लोगों को रोक कर घर से बाहर निकलने का कारण पूछा गया कुछ लोगों को तो पुलिस ने बैरंग वापस लौटा दिया जबकि कुछ लोगों को इसलिए छोड़ा गया क्योंकि उन्होंने घर से बाहर निकलने की जो मजबूरी बताई वह मजबूरी वास्तविक थी। उत्तर प्रदेश की जनता को यह सोचना चाहिए कि सरकार को लॉकडाउन लगाने से कोई लाभ नहीं है बल्कि लाभ अगर किसी को है तो वो जनता को है। लखनऊ की जनता को यह सोचकर सब्र करना चाहिए कि जहां इतने दिन लॉकडाउन के दौरान उन्होंने सब्र का परिचय देते हुए अपने घरों में वक्त गुजारा है वहीं कुछ दिन और सब्र से काम लेते हुए कोरोना को हराने के लिए अपने अपने घरों में रहकर वक्त गुजारे क्योंकि वाद-विवाद आरोप-प्रत्यारोप जिंदा इंसान ही लगा सकता है और मौजूदा समय में कोरोना वायरस से बचकर जिंदा रहने के लिए लॉक डाउन का पालन करते हुए अपने अपने घरों में रहने की जरूरत है। इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान कुछ लोगों के द्वारा सामान को महंगा करने की खबरें भी लगातार मिल रही हैं सामान्य दिनों में 160 प्रति किलो बिकने वाला सरसों का तेल कुछ दुकानदार 200 रुपए किलो तक बेच रहे हैं इसके अलावा भी कई ऐसी वस्तुएं हैं जिन पर दुकानदारों ने दाम बढ़ा दिए हैं यही नहीं सूत्रों के अनुसार लॉक डाउन के दौरान बंद की गई शराब की दुकान बंद है लेकिन शराब के शौकीन लोगों को कुछ लोग दुगने दामों में शराब की बोतलें बेचकर अपनी तिजोरिया भर रहे हैं हालांकि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बाद यह देखने को मिला है कि तमाम लोगों की जिंदगियां ना तो उनकी पहुंच बचा सकी और न ही बेशुमार दौलत ही उनके काम आ सकी इसलिए यह जरूरी है कि हम लॉक डाउन का पालन करते हुए अपना भी ख्याल रखें और लोगों की मजबूरी का फायदा ना उठाते हुए उनकी मदद के लिए जितना हो सके आगे आएं यह जरूरी नहीं है कि लॉक डाउन का पालन कराने के लिए सरकार या पुलिस जनता पर लाठियां चलाएं या मुकदमे दर्ज करें बल्कि कोरोना वायरस से बचने के लिए शहर और प्रदेश की जनता को यह प्रण लेना पड़ेगा कि उन्हें खुद लॉकडाउन के दौरान अपने घरों में रहकर अपनी और दूसरों की भी कोरोना वायरस से हिफाजत करनी होगी।