दो टूक : जल्दी आओ, बेच के जाओ, केवल अपना वोट

जल्दी आओ, 

बेच के जाओ, 

केवल अपना वोट।

मिलेगा चरपहिया वाहन संग,

ताजा असली नोट।

जल्दी आओ,

बेच के जाओ,

केवल अपना वोट।


दोनों तरफ माल है लेकिन,

इधर सुरक्षित कर से।

उधर का पैसा पोंक रहा है,

पहरेदार की डर से।


पहले नाँक तलक था अबकी,

पानी ऊपर सर से।

मेहनत और ईमान का पैसा,

निकल पड़ा है घर से।


बढ़कर माल पकड़ लेने में,

नहीं है कोई खोट।

जल्दी आओ,

बेच के जाओ,

केवल अपना वोट।


दिल्ली से लखनऊ तलक,

केवल ईमान का शासन।

फिर भी लोग बताते इसमें,

जीतेगा दुःशासन।


बैठी है कुर्सी बेचारी,

पकड़ के पेटीकोट।

जल्दी आओ,

बेच के जाओ,

केवल अपना वोट।


कुर्सी की इस जंग में सच की,

अतड़ी ऐंठ गई है।

चाल चरित्तर वाली लड़की,

घर में बैठ गई है।


काठ की नौका सिसक रही है,

लख सोने की बोट।

जल्दी आओ,

बेच के जाओ,

केवल अपना वोट।


धीरु भाई