कफ़न मे जेब नहीं होती साहेब आज कुछ इंसा समझे

किसने सोचा था की वर्ष दो हजार बीस इतनी बड़ी तबाही लाने वाला है।हर कोई अपनी सामान्य सी जिंदगी मे खुश था।निरंतर दैनिक दिनचर्या संग लोग आनंदित जीवन व्यतीत कर रहे थे।विलासिता से भरे हर एक ऐशों आराम की वस्तुओं का लुफ्त उठा रहे थे।लोग आधा खाना खाते तो आधा नाली मे ही बहाते थे।लोगों के पास वक्त ना था अपनों संग वक्त बिताने का,हसने बोलने का कौन क्या कर रहा किसी को व्यस्तता भरी जिंदगी मे कोई भी सरोकार नहीं था किसी से।पड़ोस मे कौन रहता या किसके घर मे क्या चल रहा कोई बीमार हे या नहीं किसी को किसी से कोई मतलब नहीं।शादियों मे भी भीड़भाड़, व्यंजनों की भरमार दिखावे मे लाखों रुपये की बरबादी पानी मे बहा देना उसके बावजूद भी रिश्तेदारों की नाराजगी सहन करना आदि ना जाने कितने तरीकों से हम व्यस्त थे एक लापरवाह इंसान की तरह मनमौजी बन सिर्फ़. मतलबी बन अपनों के लिये सिमित परिवार मे रहना।पेड़ो पर अतिशय कर दी थी वार कर कर के,प्राकृतिक स्थलों को भी प्रदूषित करते देखा गया,जीवजन्तु के प्रति भी असंवेदनशील रवैय्या देखा गया,किया भी गया मानव जाती द्वारा।दूसरों के दर्द को दर्द ना समझना और सिर्फ़ अपने दर्द को बहुत ही बड़ा बताना उसका स्वभाविक आदत सा बन गया था।कुछ ही गिनेचुने लोग ही थे तब जो संस्थाओं के माध्यम से समाज सेवा सामान्य रुप से करते थे।कोई इतना अधिक उत्साह नहीं था समाजसेवा करने का हमारे देश के युवा वर्गों मे।पर आज महामारी जो की हमें पूरे सौ वर्ष के समय चक्र के पूरे होने पर वर्ष दो हजार बीस से लेकर आज तक कितना कुछ सीखा दिया मौत का ऐसा भयावह मंज़र,हर ओर त्राहि-त्राहि आज सोचने के लिये हमे मजबूर कर दी है।संवेदनाओं से भर दिया आज उन मानव जाती को जो कि पत्थर दिल था इस महामारी से पहले।आज जब इस भयावह महामारी से इंसा रुबरु हुआ है हर ओर मौत का मंज़र देख उसका डरना,व्याकुलता, हर पल अपनों की सलामती की दुआ करते हुए देखा गया है।आस पड़ोस के भी हर घर के बीमार मरीज के बारे मे भी फोन पर हालचाल लेने लगा है।पड़ोस मे जो कभी किसी से बात तक ना किया वो भी आज अपने आस-पास रहने वालों का विवरण हालचाल ले रहे हैं समय-समय पर।सच आज समय इंसा को कितना कुछ सीखा दिया,कितना कुछ कहें कि दिखा भी दिया।जिन्होंने मौत को सिर्फ़ खेल समझा था या जो मौत को हल्के मे लेते थे वो भी मौत के ऐसे तांडव को देख रुह से कांप उठा है।जहां इंसान कभी किसी का सहयोग करना या किसी गरीब अपने से निम्न वर्ग वालों से बात तक करना अपनी तौहिन समझता था आज वही इंसा अपनी मानवता का परिचय बड़चड़ के दे रहा है।बहुत से लोगों को आज ये समझ आ गया है कि इंसा खाली हाथ आया था और खाली हाथ ही जाऐगा।आज बहुत ही मशहूर डायलॉग जो हेमामालिनी जी पर फिल्माया गया था और उस डायलॉग मे ये कहा गया था कि*कफ़न मे जेब नहीं होती साहेब* आज ये फिल्मी डायलॉग हकीकत मे लोगों के समक्ष चरितार्थ होते नज़र आ रहा है।जिन्होंने ताउम्र अपनी पैसा कमाने और तिजोरियों को लबालब भरने मे न्यौछावर कर दी आज उनकी चिताओं को लकड़ियाँ तक नसीब ना हो रही,ना देसी घी जलाने के लिये,ना ही कफ़न और ना ही सबसे बड़े उनके अपनों के चार कांधे तक नहीं मिल पा रहे हैं।सीधे ऐंबुलेंस से मसान घाट मे ओर अंतिम संस्कार चिता पे लिटाकर वो भी नगरनिगम के अधिकारियों या मसानघाट के प्रशासनिक व्यवस्था के द्वारा चयनित लोगों के द्वारा ही।क्या ले गये कुछ नहीं अपने साथ सिर्फ़ खाली हाथ गये।आज बस से नवयुवा जब इस बात की गहराई को समझे की फलां तो इतना अमीर था फिर भी उसे कुछ भी नसीब ना हो सका संवेदनाओं,दर्द  से भरे आज बहुत से युवा वर्ग कहें ,उसमे सम्मलित फिर चाहे कोई महिला हो या कोई भी बुजुर्ग वर्ग सभी ने आज जो देखा है आंखों से हर ओर तांडव वो भी मौत का तो उनके अंदर की आज इंसानियत जाग उठी है उन्हें कम से कम ये समझ मे आ गया है कि कफ़न मे जेब नहीं होती।मौत कब किसकी कैसे रुप मे आ जाऐ ये कह नहीं सकते।इसलिए जीते जी ये लोग दुनिया मे इंसानों की मदद् करने के लिये सेवा कार्य मे जी तोड़ मेहनत कर दिन रात लग गये हैं।किसी ने अपनी लग्ज़री गाड़ियों को सेवा कार्य मे लगा दिया,तो कोई दवा या जरूरत का खाद्यान्न पदार्थों को उपलब्ध कर मदद् कर रहा है।जिससे से संभव हो पा रहा वो उसी तरह की यथासंभव कोशिश कर किसी दूसरे इंसा को बचाने के लिये बढ़ चढ़कर अपने सच्चे इंसान होने का परिचय दे रहे हैं।आज पूरे भारत देश के वासी जात-पात का भेद ना करते हुए बस सेवा कार्य मे जुट गये हैं।आज मुस्लिम समुदाय के जावेद भाई जो की भोपाल मध्यप्रदेश से बढ़ चढकर कर अपनी सेवा दे रहे जो कि एक शिक्षक हैं परंतु आटो चलाकर मरीजों को मुफ्त मे अस्पताल पहुंचा रहे हैं।ऐसे ही गुजरात के पटेल भाई आदि अनगिनत किस्से हैं सेवा करने वाले लोगों के जिनके लिये हम सभी नतमस्तक हो शीश झुका कर नमन करते हैं।कफ़न मे जेब नहीं होती साहिब यही सोच संग आज देश को आपके सहयोग की जरुरत है तो सभी धर्म के लोग मदद् का हाथ बड़ा कर एकता.का परिचय दें और दे भी रहे हैं।

वीना आडवानी"तन्वी"

नागपुर, महाराष्ट्र