खुदा की रज़ा है

खुदा की यह रजा है

कब बनाए कब मिटा दे

इंसान में यदि इंसान है

तू कभी भी गिरने ना दे

घमंडी का सिर नीचा करे

सुख-दुख तेरे ही हैं बने

जैसे मेरी मां का आंचल है

ऐसा ही ईश तेरा इशारा है

गॉड अल्लाह और भगवान

राम रहीम कबीर का ज्ञान

काली चंडी दुर्गा तू बने

संतानों के तू दुख हरे

शिशु की एक आवाज

तेरे होने की है पहचान

कभी हाथ से सागर छूटते हैं

तो कभी चट्टान से पानी बहते हैं

एक तू है तेरा इशारा है

तू है तो वक्त बेचारा है

खोल देता है मुट्ठी अपनी

रक्षा करता है भक्तों की

वक्त है वक्त की आवाज है

दुनिया बचानी बनना इंसान है

पूनम पाठक बदायूं