महामारी में लड़ने की नहीं, एकजुट होने की है जरूरत |

किसी भी व्यक्ति के नजदीकी की मृत्यु, कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज न होने से होती है तो वह उसके जीवन का सबसे बड़ा दुःख होता है, जिसके एहसास और दर्द को सिर्फ वही लोग समझ सकते है जिन्होंने अपने किसी नजदीकी को खोया हो | देश में अब तक कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु को प्राप्त होने वाले लोगों की सरकारी संख्या 2.5 लाख से अधिक है | यह भी एक सच्चाई है की जीवन और मृत्यु का आपस में परस्पर सम्बन्ध है जहाँ जीवन के पश्चात मृत्यु का आना तय है पर यदि मृत्यु आसमयिक हो और उसके पीछे का कारण अव्यवस्था का होन हो तो ? आज पुरे देश की यही स्थिति है जहाँ संसाधनों के आभाव में भारी संख्या में लोग काल के गाल में समा रहें है | विगत 2 हफ्तों के दौरान करीब 60 लाख लोगों में कोरोना संक्रमण हुआ है | जो अपने आप में यह प्रमाणित कर रहा है की कोरोना से संक्रमित होने की गति अति तीव्र है और आगामी समय में और अफरातफरी मच सकती है | मौतों का ऐसा भयानक मंजर अब से पहले शायद ही किसी ने देखा हो | सरकारी आकड़े और वास्तविकता में जमीन आसमान का अंतर है | विभिन्न अव्यवस्थाओं के साथ - साथ सरकारों और मानवता की पोल इस महामारी ने खोल कर रख दी है | इस अति विषम परिस्थति में भी कुछ लोग पैसा बनाने में लगे हुए है जबकि आज जरूरत एक जुट होकर इस महामारी से लड़ने की है | प्रसिद्द मेडिकल जर्नल लांसेट के अनुसार अगस्त 2021 तक देश में 10 लाख लोगो की मृत्यु कोरोना से होने की सम्भावना का आकलन सभी को डरा रहा है ऐसे में हम सभी के मन में ढेरो सवाल है की आखिर कोरोना पर रोक कैसे लगायी जाये ? विभिन्न राजनेताओं का आपस में आरोप प्रत्यारोप कही न कही मानवता को शर्मसार करने वाला है इस विषम परिस्थिति में जहाँ एकजुट होने की जरूरत है वही लोग एक दुसरे की कमियां निकालने और बुराई करने में व्यस्त है जबकि यह एक निर्विवादित सत्य है की कोई भी देश या उसका शीर्ष नेतृत्व इस परिस्थिति में कभी भी नहीं चाहेगा की उनके नागरिकों के जीवन दुखद तरीके से अंत हो | यदि सरकारें / लोग वर्तमान में चल रही सभी व्यवस्थाओं के अतिरिक्त निम्न बातों पर कार्य करें तो परिस्थति और बेहतर हो सकती है |

1. सरकारें यह जिम्मेदारी ले की घर - घर सर्वे कराकर प्रत्येक जरूरतमंद लोगो तक दवा पहुचायी जाये | आशा, प्राथमिक स्कूलों के अध्यापक, ग्राम प्रधान और सेक्रेट्री का सामूहिक क्लस्टर बनाकर घर - घर जाकर लोगो का ऑक्सीजन / टेम्प्रेचर नोट कर सर्वे कराये एवं कोरोना वायरस के लक्षण वाले व्यक्ति को अविलम्ब कोरोना किट देकर संक्रमित व्यक्ति के साथ - साथ घर के सभी सदस्यों के लिए दवा उपलब्ध करायी जाये | इस टीम द्वारा नियमित देख रेख और रिकॉर्ड का संचालन अपने गाँव स्तर पर किया जाये | किसी भी मरीजी की स्थिति बिगड़ने पर नजदीकी अस्पताल में इनके द्वारा सूचना देकर गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को भर्ती कराया जाये | अर्ली स्टेज में कोरोना मरीजी का पता लगाने से ऑक्सीजन और बेड्स आवश्यकता की संख्या में कमी लायी जा सकती है | जिसका अभी अभाव है |

2. ऑक्सीजन और बेड्स के लिए अफरातफरी तेजी से बढ़ रही है इसके लिए प्रत्येक जिलें में अविलम्ब ऑक्सीजन और बेड्स की उपलब्धता कम से कम गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों के लिए उपलब्ध कराया जाये | इसके लिए जिले में उपलब्ध निजी और सार्वजानिक अस्पतालों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय लेकर अस्थायी अस्पताल बनाये जाये | 

3. यह नितांत आवश्यक है की कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश की आबादी को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर नियंत्रण किया जाय | बड़ी आबादी को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकारें 5 जिलों का एक समूह बनाये जिसकी निगरानी की जिम्मेदारी सक्षम प्रशासनिक अधिकारी को दे जो परिस्थिति के अनुरूप न केवल नियंत्रण रख सकें बल्कि सही समय पर सही निर्णय भी ले सकें |

5. विभिन्न टेलीफोनिक हेल्प लाइन्स को समाप्त करके राज्य स्तरीय और केंद्र स्तरीय विशेषज्ञ डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों की एक टीम बनायीं जाये जिसका टोलफ्री नंबर आम जन के लिए जारी किया जाये जिससे इलाज सम्बन्धी मदद और जानकारी आम जन को प्राप्त हो सकें |

6. विभिन्न जन प्रतिनिधयों को आम जन की रक्षा के लिए न केवल अपने क्षेत्र के निवासियों के लिए भारी अनुदान दे कर दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये बल्कि लोगों में नियमित संवाद बनाये रखा जाये जिससे लोगों में भरोसा बना रहें और साहसिक होकर इस बीमारी का सामना कर सकें | धनाड्य लोग आम जन के जीवन की रक्षा के लिए सामने आने चाहिये | जिससे पैसो के आभाव में किसी की मृत्यु न हो |

7. विभिन्न न्यूज़ चैनल्स और सोशल मीडिया पर प्रतिबन्ध लगाया जाये जो लोगो में डर का निर्माण कर रहें है सकारात्मक ख़बरों की प्राथमिकता रखी जाये जिससे लोगों में आत्मविश्वास बना रहें | अनेकों लोग डर की वजह से अपना जीवन समाप्त कर रहें है |

8. कोरोना संक्रमित लोगों और मृत्यु होने वाले लोगों का केन्द्रीय डाटा तैयार किया जाये जिससे सरकारों पर डेटा छिपाने का आरोप न लगे और कोई भी व्यक्ति जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें | कोरोना संक्रमण से मृत्युं होने वाले लोगों के आश्रितों को आर्थिक सहायता सरकार द्वारा दी जाये जिससे उनके जीवन में भरण पोषण की समस्या न उत्पन्न हो सकें | इलाज में लापरवाही करने वाले अस्पतालों, कालाबाजारी करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर दंड पारित किये जाये | किसी भी व्यक्ति की मृत्यु यदि कोरोना संक्रमण की वजह से हुयी है और उसका नाम केन्द्रीय डेटा प्रणाली में नहीं है तो उसे अधिकार दिया जाये की उसके सगे सम्बन्धी उसका विवरण आधार कार्ड के नंबर के साथ स्वयं उस वेबसाइट पर अपलोड कर सकें |

9. विभिन्न विशेषज्ञों की राय के अनुसार टीकाकरण के जरिये ही कोरोना संक्रमण को रोका जा सकता है | अभी टीकों का व्यापक आभाव है ऐसे में सरकार प्राथमिक रूप से टीका उन लोगों को लगाये जो घर से बाहर जाकर कार्य करते है | पर्याप्त टीकों की उपलब्धता होने पर अन्य लोगों को टीका लगाने की व्यवस्था सरकार करें | ऐसा करने से आर्थिक गतिविधि की न केवल शुरुआत की जा सकती है बल्कि देश दोहरी मार से बच सकता है |

10. संक्रमण बढ़ने के साथ - साथ डॉक्टर्स की कमी भी समस्या के रूप में सामने आ रही है गावों में इसका व्यापक आभाव है | ऐसे में झोला छाप डॉक्टर्स भी एक विकल्प के रूप में हो सकते है जिन्हें ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर कोरोना इलाज की किट देने और डोज की मात्रा के बारें में बता कर गावों में इलाज कराया जा सके |  

11. कोरोना संक्रमण से मृत्यु की दुखद स्थिति में सभी धर्म और समुदाय के नियमो के अनुसार सरकार द्वारा निःशुल्क क्रियाक्रम कराना चाहिये और यह कार्य कागजों पर नहीं बल्कि जमीनी रूप से होना चाहिये जिससे लाश नदी में बहाने की घटना की पुनरावृत्ति न हो और मानवता पुनः शर्मसार न हो |

याद रखिये यह एक वैश्विक महामारी है जिसकी अकेले की जिम्मेदारी किसी एक पर नहीं है बल्कि पुरे सिस्टम और समूह पर जरुर है | आजादी के दशकों पश्चात आज तक हम जमीनी आवश्यकताओं की पूर्ति अभी तक नहीं कर पाए है | किसी पर भी आरोप लगाने से कही बेहतर होगा की हम सब मिलकर इस महामरी का सामना करें | जिसके पास जो भी संसाधन है जिससे इस महामारी में दूसरों की मदद की जा सके उसे बिना किसी भेदभाव और देरी के करना चाहिये | 100 वर्षो पूर्व देश में आयी स्पेनिश फ्लू की महामारी में भी लकड़ी के आभाव में या गरीबी की वजह से अनेकों लाशों को नदी में बहाने की घटनाएँ प्रकाश में आयी थी उसी तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति पुनः हो रही है जो न केवल मानवता को शर्मसार कर रही है बल्कि एक बेहद दुखद और दर्द का इतिहास का भी लिख रही है | हम 100 वर्षो पश्चात् भी उसी स्थान पर खड़े है यह बेहद तकलीफ देने वाला भी है | किसी पर भी आरोप लगाने के पहले हम सब को यह भी नहीं भूलना चाहिये की स्वास्थ्य सेवाओं में हमशे बेहतर होने के बावजूद अमेरिका में कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या (5.80 लाख) विश्व में सबसे अधिक रही है | अब जरूरत है की एकजुट होकर इस महामारी से लड़ा जाये | गुजरात और बदायूं की, सामूहिक रूप से एक जगह एकत्र होने की घटना कही न कही इस बात पर सोचने के लिए बल देती है की क्या हम अपने विनाश के लिए स्वयं तुले हुए है ? बेहद गंभीर परिस्थिति में भी हम लापरवाही कर रहें है और आरोप दूसरों पर लगा रहें है | सरकारों को चाहिये की इन बातों पर अमल करके देश के नागरिकों की रक्षा करें | पुनः हम सब को ध्यान रखना है की यह एक वैश्विक महामारी है जिससे लड़ने के लिए हम सब को एकसाथ एकजुट होना ही पड़ेगा  और यही अंतिम विकल्प भी हमारे पास है |


डॉ. अजय कुमार मिश्रा  

drajaykrmishra@gmail.com

9335226715

लखनऊ