खाने के होटल बंद होने से खाने के लिए परेशान हैं हजारों परदेसी

लखनऊ। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर को रोकने के लिए संपूर्ण उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन जारी है और आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को छोड़कर अन्य सभी दुकानों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है लेकिन शायद सरकार या जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जहां करीब 50 लोग बसते हैं वहां रहने वाले हजारों उन परदेसियों के बारे में विचार नहीं किया जो होटल के सस्ते खाने पर ही निर्भर रहते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आकर रोटी रोजी कमाने वाले हजारों ऐसे लोग हैं जो फुटपाथ पर सोते हैं और होटलों का खाना खाते हैं लेकिन लॉकडाउन के दौरान सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को लॉक डाउन की बंदिशों से दूर रखा परंतु इंसान के जीने के लिए अत्यंत जरूरी भोजन के होटलों को पूरी तरह से बंद कर दिया। होटलों के बंद होने से राजधानी लखनऊ की सड़कों पर रहने वाले हजारों लोगों के सामने अब दो वक्त की रोटी जुटा पाना टेढ़ी खीर हो गई है क्योंकि तमाम ऐसे लोग हैं जो लखनऊ जिले के आसपास या अन्य प्रदेशों से आकर यहां ई रिक्शा चलाते हैं या मजबूरी करते हैं और रात को किसी फुटपाथ पर या किसी ओवर ब्रिज के नीचे गुजारते हैं उनका यहां कोई घर नहीं है ऐसे हालात में सड़कों और ओवरब्रिज के नीचे रात्रि को गुजारने वाले हजारों लोगों का कारोबार तो बंद है लेकिन पेट भरने के लिए अब उन्हें शहर के होटलों में खाना भी नहीं मिल रहा है। ऐसे लोग फुटपाथ पर ही ईंटो का चूल्हा बना कर किसी तरह भोजन तैयार कर अपना पेट भर रहे हैं हालांकि सरकार को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में खाने के उन होटलों को भी लाना चाहिए जहां मेहनत मजदूरी करने वाले हजारों लोगों को सस्ता खाना उपलब्ध हो जाता था। हालांकि अगर यह कहा जाए कि होटल पूरी तरह से बंद हैं तो शायद गलत होगा क्योंकि आन लाइन भोजन डिलीवरी तमाम होटलों से लोगों को होम डिलीवरी खाने की सुविधा लगातार उपलब्ध हो रही है। लोग अपने मोबाइलों से खाने बुक करा कर उन्हें ऑनलाइन मंगा कर अपने घरों में स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे हैं लेकिन फुटपाथ पर सोने वाले जिन लोगों के घर और कोई पते नहीं हैं और ना ही उनके पास महंगे मोबाइल हैं और न ही उनको ऑनलाइन पर खाना आर्डर करना मालूम है उन लोगों के सामने पेट भरना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है ऐसे तमाम लोगों का कहना है जो सड़कों पर रहने वाले हजारों लोगों की भूख मिटाने के लिए सरकार को मलिन बस्तियों के आसपास या पुराने लखनऊ में कुछ ऐसे होठों को कोविड प्रोटोकॉल के तहत खोलने की इजाजत देनी चाहिए जहां गरीबों के लिए सस्ता खाना उपलब्ध होता है। साल 2020 में जब 68 दिनों के लिए समूचे भारत में लॉकडाउन लागू किया गया था तब सरकार की तरफ से कम्युनिटी किचन का संचालन किया जा रहा था कम्युनिटी किचन में पकाया जाने वाला खाना शहरों में आकर रोजी रोटी कमाने वाले उन हजारों परदेसियों को भी मिल रहा था जो होटलों के खानों पर निर्भर रहते हैं लेकिन इस बार अभी तक कम्युनिटी किचन का संचालन नहीं हो रहा है जिसकी वजह से हजारों लोगों के सामने खाने का संकट है।