कलम की धार

कलम ,साहित्यकार की पहचान ।

देती बना ,एक नया  कीर्तिमान ।।

सकती लगा, विचारों की चिन्गारी।

क्यों न हो ,कोई कितना भृष्टाचारी।।

सकती है कर ,एक युग   परिवर्तन।

न करती ,भेदभावपूर्ण कोई सृजन।।

न करती ,अधिकारों से  वंचित।

अपमानों से भी, न हो वो रंचित।।

आओ रचें ,एक नया इतिहास।

न देंगें जाने ,शहीद बलिदान बेकार।।

राष्ट्र हित का ,  लिखेंगें  समाचार।

बना कलम को, अपनी पैनी धार।।

स्वतन्त्रता युग में ,जो भूमिका निभाई।

आज जरूरत ,फिर उसकी है आई।।

सर्वाधिकार सुरक्षित 

अन्जनी अग्रवाल ओजस्वी

कानपुर नगर उत्तरप्रदेश

 9935484369