यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में भारत ने हिस्सा लिया - कोविड-19, प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर विचार विमर्श हुआ

गोंदिया - वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी ने वैश्विक स्वस्थ्य समाज पर अपने संक्रमण रूपी काली छाया से ओढ़कर वैश्विक मानव समाज पर कुठाराघात किया है। क्योंकि कोरोना महामारी का आघात पूरे मानव समाज पर हुआ है। अतः इस महामारी से निपटने के लिए पूरे विश्व को एकजुट होना होगा और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक स्वस्थ मानव समाज का निर्माण करने के लिए अब अत्यंत तात्कालिक समय आ गया है कि वैश्विक रूप से एकजुट होकर कोरोना वैक्सीन पेटेंट राइट्स को सीमित अवधि के लिए सस्पेंड करना चाहिए ताकि वैक्सीन का उत्पादन बढ़े और मानव के प्राण बचे।...बात अगर हम शनिवार दिनांक 8 मई 2021 को हुए यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की करें तो भारत को पहले से ही इस शिखर सम्मेलन से काफी उम्मीदें थी और कोरोना महामारी के चलते इस पहली बार हुए वर्चुअल अंदाज में सम्मेलन का आयोजन हुआ। शिखर सम्मेलन में कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने, जलवायु और पर्यावरण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, टेक्नोलॉजी और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चर्चा से बैठक में शामिल नेताओं ने महत्वकांक्षी और व्यापक संपर्क साझेदारी का शुभारंभ किया। जिसमें डिजिटल, उर्जा, परिवहन, और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा यह साझेदारी सामाजिक, आर्थिक, वित्तीय और पर्यावरणीय सुरक्षा तथा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और प्रतिबद्धताओं के सम्मान पर आधारित है। इस वर्चुअल बैठक में 27 देशों के नेता तथा यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष शामिल हुए। यूरोपीय संघ पहली बार इस फॉर्मेट में भारत के साथ इस बैठक की मेजबानी की। इस बैठक का आयोजन यूरोपीय संघ परिषद के वर्तमान अध्यक्ष पुर्तगाल के प्रधानमंत्री की पहल पर किया गया था।...बात अगर हम इस शिखर सम्मेलन में कोविड-19 पर चर्चा की करें तो यूरोपीय संघ के सदस्यों ने कोविड -19 वैक्सीन का उत्पादन करने और वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम के माध्यम से 90 देशों से अधिक देशों को कोविड वैक्सिन वितरित करने के लिए भारत के प्रयासों का स्वागत किया। कई दिनों से हम देख रहे हैं कि पूरे विश्व से भारत को मेडिकल संसाधनों, कोविड वैक्सीन, दवाइयों की आपूर्ति निरंतर मदद के रूप में की जा रही है जिसके लिए भारत ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का मुकाबला करने में यूरोपीय संघ और इनके सदस्य देशों की मदद की सराहना भी की। कोरोना महामारी पर विस्तार से चर्चा हुई और वैक्सीन कोसमय रहते पूरी दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। साझा बयान में कहा गया कि हम साथ मिलकर इस कोरोना महामारी को हराएंगे और अपनी एकजुटता के जरिए एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज का निर्माण करेंगे। कोरोना लड़ाई में काम आनेवाले दूसरे उपकरणों को भी कम समय में हर देश तक पहुंचाने की बात कही गई...। बात अगर हम 5G टेक्नोलॉजी और आतंकवाद की करें तो इस संबंध में इसके खिलाफ एक साझा रणनीति बनाने की बात कही गई और साझा बयान में लिखा गया के हम हर तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं और इसकी फंडिंग रोकने आपसी साझा साझेदारी हो। साझा बयान में कहा गया कि अब 5G टेक्नोलॉजी से भी आगे की सोचना चाहिए अब क्लाउड सर्विस को और ज्यादा सुरक्षित व ओपन बनाना चाहिए। सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया कि इस ट्रायल में अब चीनी कंपनियों को मौका नहीं दिया जाएगा। अतः अब यूरोपीय संघ के लिए एक बड़ा अवसर उत्पन्न हो सकता है।.. बात अगर हम शिखर सम्मेलन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हुई चर्चा की करें तो भारत और यूरोपीय संघ मैं 8 वर्ष बाद मुक्त व्यापार समझौते पर फिर बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया गया है। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ संतुलित, महत्वकांक्षी, व्यापक और परस्पर लाभकारी व्यापार समझौते तथा निवेश संरक्षण संधि के लिए प्रतिबद्ध है। इस समझौते के लिए यूरोपीय संघ द्वारा फिर बातचीत करने की घोषणा पर वाणिज्य मंत्री ने प्रसन्नता जाहिर की और कहा कि जल्द से जल्द इसे अंतिम रूप दिए जाने की दिशा में मिलकर काम करेंगे। आगे कहा कि भारत में वैक्सीन उत्पादन बढ़ाया जा रहा है उन्होंने कोविड-19 संकट में यूरोपीय संघ और सदस्यों के मदद के लिए भी आभार प्रकट किया। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन पर भी चर्चा हुई और संयुक्त बयान में पैरिस समझौते को मजबूत करने और तमाम लक्ष्यों को समय रहते पूरा करने पर जोर दिया गया और भारत की तारीफ की गई कि इस दिशा में भारत ने शानदार काम किया है। यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन पर पीएम महोदय ने ट्वीट कर खुशी जाहिर की कि कई जरूरी मुद्दों पर विस्तार से बात हुई और कुछ फैसले भी हुए। ट्वीट के जरिए लिखा के कोरोना महामारी को हराने वैश्विक साझा साझेदारी बहुत जरूरी है ताकि एकजुट होकर इस महामारी से मुकाबला कर सकें वही हमें स्थाई और समावेशी रिकवरी पर भी जोर देना है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे मामले का विश्लेषण करें तो कोरोना महामारी के इस भयंकर दौर से निपटने के लिए वैश्विक एकजुटता, वैक्सीनेशन पेटेंट को अस्थाई रूप से सस्पेंड करने, वैक्सीन की आपूर्ति में वैश्विक सहयोग और मेडिकल संसाधनों से सहयोग का भाव अत्यंत जरूरी है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र