सत्य..

दो टूक, गर आप सत्य कहें,तो हो जाता है, पूरा संवाद।

सौ बात की एक बात, ना रखना पड़ता याद।


प्रेम गर सत्य अटूट आपका, तो आपको दिला ही, देता एहसास।

और प्यास को,  जब हृदय अपनाता, तब होता विघ्नों का नाश।


होता विघ्नों का नाश, आत्मसाक्षात्कार, हम कर पाते, रिश्तों की भागदौड़ के तब,सफल अधिकारी वन पाते। 


सत्य मार्ग पर हम जो चलेंगे,

तो निश्चित प्रभु कृपा होगी अपार, डिगने ना देगी प्रभु की शीतल छाया। 

लगाएगा ही बह बेंडापार।


सत्य,क्षमा, त्याग वैराग्य, और उपरति,

हैं मनुष्य के आभुषण।

इनसे बिमुख ना कोई हो। अकारण ही करे हम इनको धारण।


नाद में सत्य का ही  साज,, सत्य ही तो नाथ है।

सत्य को साक्ष्य की कोई आवश्यकता नहीं,, सत्य स्वयं ही साक्ष्य है।


आशु गुप्ता.. जिला शाहजहांपुर

ग्राम रजमना